RBI MPC Meeting : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज 3 जून से शुरू हो रही है. यह बैठक 5 जून तक चलेगी और इसी दिन सुबह गवर्नर द्वारा समिति के सभी नीतिगत फैसलों का ऐलान किया जाएगा. देश भर के मध्यम वर्ग और कर्जदारों की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होता है कि आपके होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) घटेगी या बढ़ेगी.
बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, देश और दुनिया के मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए इस बैठक में ब्याज दरों (रेपो रेट) में कटौती की उम्मीद बेहद कम है. इससे पहले अप्रैल में हुई इस वित्त वर्ष की पहली बैठक में भी दरों को यथावत (स्थिर) रखा गया था.
साल 2025 में मिली थी बड़ी राहत
पिछले साल (2025) रिजर्व बैंक ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए चार अलग-अलग मौकों पर रेपो रेट में कुल 1.25% की भारी कटौती की थी, जिसके बाद ब्याज दरें 5.25% के निचले स्तर पर आ गई थीं.
- फरवरी 2025: करीब 5 साल के लंबे अंतराल के बाद ब्याज दरों को 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया.
- अप्रैल 2025: दरों में फिर 0.25% की कटौती हुई.
- जून 2025: तीसरी बार में आरबीआई ने सीधे 0.50% की बड़ी कटौती की.
- दिसंबर 2025: साल के अंत में 0.25% की एक और कटौती के बाद ब्याज दरें 5.25% पर स्थिर हो गईं.
रिजर्व बैंक क्यों बढ़ाता या घटाता है ब्याज दरें?
भारतीय रिजर्व बैंक देश का सेंट्रल बैंक है और उसके पास ‘रेपो रेट’ (पॉलिसी रेट) के रूप में महंगाई से लड़ने का एक बहुत ही शक्तिशाली हथियार होता है.
जब महंगाई (Inflation) ज्यादा होती है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को बढ़ा देता है. इससे बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है. बैंक आम ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं. लोन महंगा होने से लोग गाड़ियां, मकान या अन्य चीजें कम खरीदते हैं (डिमांड घटती है), जिससे बाजार में पैसों का फ्लो कम होता है और महंगाई अपने आप काबू में आ जाती है.
जब इकोनॉमी को रफ्तार देनी होती है जब आर्थिक मंदी का दौर हो या विकास दर बढ़ानी हो, तो आरबीआई ब्याज दरों को घटा देता है. इससे लोन सस्ते हो जाते हैं, लोग जमकर खरीदारी और निवेश करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आती है.
हर दो महीने में क्यों बैठती है यह कमिटी ?
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) में कुल 6 सदस्य होते हैं. इनमें से 3 सदस्य खुद आरबीआई के होते हैं (गवर्नर सहित) और बाकी 3 सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है.
यह कमिटी हर दो महीने में देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई की समीक्षा के लिए बैठक करती है. केंद्रीय बैंक द्वारा जारी वित्त वर्ष 2026-27 के आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक, इस पूरे साल में कुल 6 बैठकें होनी हैं, जिनमें से यह इस वित्त वर्ष की दूसरी बैठक है.
Also Read : 3 जून को सोने और चांदी के दाम गिरे, चेक करें अपने शहर का भाव
