Repo Rate: 6 से 8 अप्रैल तक चलने वाली आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर पूरे देश की नजर है. पहले कयास लगाए जा रहे थे कि ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, लेकिन पश्चिम एशिया (इजरायल-ईरान) के संकट ने रिजर्व बैंक के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद न के बराबर है.
आपकी EMI पर क्या होगा असर?
अगर आपने होम लोन या कार लोन ले रखा है, तो फिलहाल आपकी ईएमआई (EMI) घटने की उम्मीद कम है. SBI रिसर्च का कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितता को देखते हुए RBI रेपो रेट में कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा. यानी ब्याज दरें जहां हैं, वहीं टिकी रह सकती हैं.
रुपया कमजोर, महंगाई का डर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है. जब रुपया कमजोर होता है, तो बाहर से आने वाली चीजें (जैसे तेल, मशीनरी) महंगी हो जाती हैं. इसे ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ कहते हैं. इसके अलावा, ‘सुपर अल नीनो’ की वजह से खेती पर बुरा असर पड़ने की आशंका है, जिससे खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं.
तेल की आग और 1973 जैसा संकट
इजरायल-ईरान संघर्ष की वजह से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (समुद्री रास्ता) पर खतरा मंडरा रहा है. रिपोर्ट की मानें तो यह 1973 के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट पैदा कर सकता है. कच्चा तेल $100 के ऊपर रहने से भारत का बजट बिगड़ रहा है.
ब्याज दरें घटाने के बजाय RBI बाजार में पैसों के बहाव को कंट्रोल करने के लिए ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे तकनीकी कदम उठा सकता है. इसमें बैंक लंबे समय के सरकारी बॉन्ड खरीदता है और कम समय के बॉन्ड बेचता है, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे.
2025 में 4 बार घटी रेपो रेट
| महीना | पहले की दर | नई दर |
|---|---|---|
| फरवरी | 6.50% | 6.25% |
| अप्रैल | 6.25% | 6.00% |
| जून | 6.00% | 5.50% |
| दिसंबर | 5.50% | 5.25% |
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