RBI MPC Meeting: क्या इस बार होम लोन की EMI घटेगी? जानिए ब्याज दरों पर क्या रह सकता है फैसला

क्या RBI रेपो रेट घटाकर होम लोन EMI में राहत देगा? MPC Meeting से पहले जानिए महंगाई, कच्चे तेल और ब्याज दरों को लेकर क्या है एक्सपर्ट्स की राय.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन की बैठक सोमवार, 3 अगस्त से शुरू हो गई है. बैठक का सबसे अहम फैसला 5 अगस्त को आएगा. फिलहाल ज्यादातर अर्थशास्त्रियों (Economists) का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकता है. इसकी वजह बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता को माना जा रहा है.

हालांकि ब्याज दरों में फिलहाल राहत मिलने की संभावना कम है, लेकिन RBI की टिप्पणी पर बाजार, बैंक और करोड़ों होम लोन लेने वालों की नजर रहेगी.

क्या इस बार EMI में कोई राहत मिलेगी?

अगर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की EMI में भी तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा.

  • मौजूदा रेपो रेट 5.50% है.
  • जून 2026 की मौद्रिक नीति में RBI ने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) की कटौती की थी.
  • पिछले साल से अब तक कुल 1.25% की कटौती हो चुकी है.

यानी फिलहाल नए EMI राहत की उम्मीद करने वालों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है.

RBI किन बातों पर सबसे ज्यादा नजर रख रहा है?

इस बार नीति बैठक में सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि कई दूसरे आर्थिक संकेतकों पर भी चर्चा होगी.

फैक्टरक्यों है अहम?
कच्चे तेल की कीमतमहंगाई बढ़ सकती है
पश्चिम एशिया का तनावआयात और कीमतों पर असर पड़ सकता है
खुदरा महंगाईजून में 4.38% रही, जो RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर है
मानसूनकमजोर बारिश से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिकी फेड का रुखविदेशी निवेश और रुपये पर असर पड़ सकता है
बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटीआगे की मौद्रिक नीति तय करने में मदद मिलेगी

FD निवेशकों और नए लोन लेने वालों के लिए क्या मतलब है?

अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले मौजूदा रिटर्न कुछ समय तक बने रह सकते हैं. ऐसे में जिन लोगों को सुरक्षित निवेश पसंद है, उनके लिए अलग-अलग अवधि की FD में निवेश करना एक ऑप्शन हो सकता है. वहीं, नया होम लोन लेने की योजना बना रहे लोगों को सिर्फ संभावित रेट कट का इंतजार करने के बजाय अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, लोन स्प्रेड और अन्य शुल्क की तुलना करनी चाहिए.

आगे RBI का अगला कदम किस पर निर्भर करेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाएगा. जून में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए उठाए गए कदमों से अच्छी मात्रा में विदेशी निवेश आया है, जिससे फिलहाल मुद्रा पर दबाव कम हुआ है. अब आगे का फैसला मुख्य रूप से महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, मानसून की स्थिति और वैश्विक आर्थिक माहौल पर निर्भर करेगा. अगर आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ती है या कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो RBI का रुख और सख्त हो सकता है. वहीं, हालात सामान्य रहने पर ब्याज दरों में बदलाव को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा.

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लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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