RBI MPC meet: आज से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी’ (MPC) की अहम बैठक शुरू हो रही है. नए वित्त वर्ष (2026-27) की यह पहली बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
क्या ब्याज दरों में बदलाव होगा?
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर एक्सपर्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि RBI इस बार ब्याज दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा. रॉयटर्स के एक पोल के मुताबिक, 71 में से 69 एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेपो रेट 5.25% पर ही स्थिर रहेगा. हालांकि, ईरान-इजरायल कॉन्फ्लिक्ट के कारण बाजार में थोड़ी घबराहट है, जिससे कुछ लोग फ्यूचर में रेट बढ़ने की आशंका भी जता रहे हैं.
बढ़ती महंगाई और तेल का क्या है चक्कर?
पिछले साल इंडियन इकोनॉमी ‘गोल्डिलॉक्स’ फेज (मजबूत ग्रोथ और कम महंगाई) में थी, लेकिन अब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने खेल बिगाड़ दिया है. अगर तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहते हैं, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ 7% से घटकर 6% पर आ सकती है. साथ ही, फरवरी में जो महंगाई 3.2% थी, वह बढ़कर 5% तक पहुंच सकती है.
क्या रुपया और गिर सकता है?
मिडिल ईस्ट क्राइसिस की वजह से रुपया कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच गया है. एक्सिस बैंक और HSBC के जानकारों का कहना है कि RBI का मुख्य फोकस अब बाजार को स्थिर करने और रुपए को संभालने पर होगा. SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती तेल कीमतों के साथ-साथ ‘सुपर अल-नीनो’ का खतरा भी बना हुआ है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल राहत की बात यह है कि रेट बढ़ने की संभावना कम है, यानी आपकी लोन की EMI तुरंत नहीं बढ़ेगी. लेकिन अगर ग्लोबल हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में RBI को महंगाई काबू करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं. फिलहाल, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा और उनकी टीम वेट एंड वॉच की नीति अपना सकती है.
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