RBI Dividend : पश्चिम एशिया (Middle East) संकट और डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरते स्तर से जूझ रही केंद्र सरकार के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है. 22 मई 2026 को आरबीआई ने मोदी सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपये (लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपये) ट्रांसफर करने का ऐलान किया है.
यह रकम केंद्र सरकार को डिविडेंड (लाभांश या सरप्लस) के तौर पर दी जाएगी. आरबीआई के इतिहास में सरकार को दिया जाने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड है. यह फैसला 22 मई को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय बैंक की 623वीं सेंट्रल बोर्ड मीटिंग में लिया गया.
सरकार को कैसे मिलेगी इससे मदद ?
यह भारी-भरकम रकम मिलने से मोदी सरकार को अपनी कमाई और खर्च के अंतर को पाटने, यानी राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी. राजकोषीय घाटा वह स्थिति होती है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई (उधार को छोड़कर) से ज्यादा हो जाता है.
इस ऐतिहासिक लाभांश से सरकार को फाइनेंशियल तौर पर काफी मजबूती मिलेगी, जिससे वह देश के विकास कार्यों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़कें, एनर्जी, शहरी विकास और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुलकर खर्च कर पाएगी. विशेषकर ऐसे समय में जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के तनाव के कारण कच्चा तेल महंगा हो रहा है और भारत के लिए आयात (विदेश से सामान खरीदना) महंगा हो गया है, यह पैसा सरकार के लिए संजीवनी का काम करेगा.
पिछले सालों के मुकाबले कितनी बढ़ी रकम ?
आरबीआई हर साल अपनी कमाई का एक हिस्सा सरकार को सौंपता है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इस बार सरकार की लॉटरी लगी है.
| वित्त वर्ष | RBI द्वारा सरकार को दिया गया डिविडेंड | पिछले साल से तुलना |
| 2025-26 (मौजूदा) | ₹2,86,588.46 करोड़ | पिछले साल से 6.7% (₹17,998 करोड़) ज्यादा |
| 2024-25 | ₹2.69 लाख करोड़ | — |
| 2023-24 | ₹2.10 लाख करोड़ | — |
| 2022-23 | ₹87,416 करोड़ | — |
आखिर कैसे हुई RBI को इतनी मोटी कमाई?
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि नोट छापने वाले आरबीआई को इतनी कमाई कैसे हुई? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल आरबीआई के इतने भारी मुनाफे (सरप्लस) का सबसे बड़ा कारण विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में डॉलर की बिक्री है. दरअसल, रुपये को लगातार गिरने से बचाने और उसे संभालने के लिए आरबीआई ने बाजार में बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे. डॉलर की इस खरीद-फरोख्त से आरबीआई को जबरदस्त मुनाफा हुआ, जिसका फायदा अब देश के खजाने को मिल रहा है.
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