Patanjali Foods के हाथों बिकेगा बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद, बनेगी एफएमसीजी कंपनी

Patanjali Foods: पतंजलि फूड्स ने कहा कि यह सौदा कंपनी के एक अग्रणी एफएमसीजी कंपनी में बदलने की प्रक्रिया को रफ्तार देगा. पतंजलि फूड्स और पतंजलि आयुर्वेद ने लाइसेंस समझौते पर भी सहमति जताई है.

Patanjali Foods: योगगुरु बाबा रामदेव की अगुआई वाली पतंजलि फूड्स ने पतंजलि आयुर्वेद को खरीदने का ऐलान किया है. मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, पतंजलि आयुर्वेद ने अपने घरेलू और निजी देखभाल कारोबार को 1,100 करोड़ रुपये में ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड को बेचने का फैसला किया है. इस अधिग्रहण से खाद्य तेल कंपनी पतंजलि फूड्स को एफएमसीजी (रोजमर्रा का सामान बनाने वाली) कंपनी बनने में मदद मिलेगी.

Patanjali Foods के बोर्ड ने दी सौदे की मंजूरी

पतंजलि फूड्स की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, पतंजलि फूड्स के निदेशक मंडल ने पतंजलि आयुर्वेद के पूरा गैर-खाद्य कारोबार यानी बालों और त्वचा की देखभाल, दांतों की देखभाल और घर में उपयोग वाले उत्पादों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है. इसमें सभी चल संपत्तियां, अचल संपत्तियां, अनुबंध, लाइसेंस, किताबें और रिकॉर्ड, कर्मचारी और पीएएल की कुछ ग्रहण की गई देनदारियां शामिल हैं. यह सौदा शेयरधारकों, कर्जदाताओं और अन्य आवश्यक मंजूरियों के अधीन है.

एफएमसीजी कंपनी बनेगी Patanjali Foods

पतंजलि फूड्स ने कहा कि यह सौदा कंपनी के एक अग्रणी एफएमसीजी कंपनी में बदलने की प्रक्रिया को रफ्तार देगा. शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा गया है कि पतंजलि फूड्स और पतंजलि आयुर्वेद ने लाइसेंस समझौते पर भी सहमति जताई है. इससे कंपनी को पतंजलि आयुर्वेद के स्वामित्व वाले ट्रेडमार्क और संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकारों का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलेगी.

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1100 करोड़ में पतंजलि आयुर्वेद को खरीदेगी Patanjali Foods

पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड्स का सौदा स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं के मूल्यांकन के आधार पर 1,100 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि में हुआ है. निदेशक मंडल की मंजूरी के बाद पतंजलि फूड्स अब अधिग्रहण के संबंध में निश्चित समझौतों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी और आवश्यक मंजूरियां हासिल करने के लिए आवेदन करेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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