Parle-G: महंगा होगा Parle-G बिस्किट, वजन भी घटेगा, जानें कारण और कब से होगा लागू

Parle-G: CNBCTV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रमुख (FMCG) कंपनी पारले प्रोडक्ट्स जनवरी 2025 से अपने उत्पादों की कीमतों में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती है.

Parle-G: CNBCTV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रमुख (FMCG) कंपनी पारले प्रोडक्ट्स जनवरी 2025 से अपने उत्पादों की कीमतों में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती है. यह मूल्य वृद्धि ब्रेड, बिस्किट, रस्क, केक, और स्नैक्स जैसे उत्पादों की बड़े स्केल पर लागू होगी.

Parle-G के वजन में भी कटौती

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पारले अपने ‘एंट्री-लेवल और लो-यूनिट प्राइस पैक’ उत्पादों के वजन को 5-10 प्रतिशत तक कम करने पर विचार कर रही है. इसका असर पारले-जी बिस्किट और अन्य एंट्री-लेवल उत्पादों पर देखने को मिलेगा.

Parle-G की कीमतों में वृद्धि के कारण

कंपनी ने यह कदम कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और पाम ऑयल पर बढ़े हुए आयात शुल्क के कारण उठाने की योजना बनाई है. इससे पहले भी, 2021 में पारले ने चीनी, गेहूं, और खाद्य तेल की लागत में वृद्धि के कारण अपने लोकप्रिय उत्पादों जैसे पारले-जी, हाइड एंड सीक, और क्रैकजैक की कीमतों में 5-10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी.

अन्य उत्पादों पर प्रभाव

बिस्किट के अलावा, रस्क और केक की कीमतों में 7-8 प्रतिशत तक वृद्धि हुई थी. खासतौर पर ग्लूकोज बिस्किट पारले-जी की कीमत में 6-7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी. हालांकि, यह बढ़ोतरी केवल 20 रुपये और उससे अधिक मूल्य के पैक्स पर लागू थी. यह मूल्य वृद्धि और वजन में बदलाव उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो एंट्री-लेवल उत्पाद खरीदते हैं.

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बदलाव के पीछे कारण

1. कच्चे माल की बढ़ती कीमतें:

  • चीनी, गेहूं और खाद्य तेल की बढ़ती लागत का असर पारले के उत्पादन खर्चों पर पड़ा है.
  • पाम ऑयल की कीमतों में तेज वृद्धि और उस पर आयात शुल्क बढ़ने से कंपनी पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है.
  • इन कारणों से कंपनी को अपनी कीमतों में वृद्धि करनी पड़ रही है.

2. उत्पादन लागत प्रबंधन:

  • वजन में कमी से कंपनी अपने उत्पादन खर्चों को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है.
  • छोटे पैक के वजन में 5-10% की कटौती से ग्राहकों को यह बदलाव कम महसूस होगा.

पूर्व के मूल्य वृद्धि उदाहरण

2021 में बदलाव:

  • पारले ने अपने प्रमुख उत्पादों जैसे पारले-जी, हाइड एंड सीक, और क्रैकजैक की कीमतों में 5-10% की वृद्धि की थी.
  • रस्क और केक की कीमतों में 7-8% तक की वृद्धि हुई थी.
  • ग्लूकोज बिस्किट पारले-जी की कीमत में 6-7% तक की बढ़ोतरी की गई थी.

पार्ले जी बिस्किट की शुरुआत कब हुई थी?

पार्ले जी बिस्किट की शुरुआत 1939 में हुई थी और इसे पहले ‘पार्ले ग्लूको’ के नाम से जाना जाता था.

पार्ले जी बिस्किट के पैकेट पर दिखने वाली लड़की कौन है?

पार्ले जी बिस्किट के पैकेट पर दिखने वाली लड़की एक वास्तविक व्यक्ति नहीं है. यह तस्वीर 60 के दशक में चित्रकार मगनलाल दहिया द्वारा बनाई गई थी.

क्या पार्ले जी बिस्किट की कीमतें समय-समय पर बढ़ती हैं?

पार्ले जी बिस्किट की कीमतें 1994 से स्थिर थीं, लेकिन कोविड-19 के बाद 2021 में इसकी कीमत में 5 रुपये का इजाफा हुआ.

पार्ले ग्रुप की स्थापना कब हुई थी?

पार्ले ग्रुप की स्थापना 1929 में मोहन दयाल चौहान के परिवार ने की थी.

पार्ले ग्रुप किन-किन उत्पादों का निर्माण करता है?

पार्ले ग्रुप बिस्किट, कन्फ़ेक्शनरी और स्नैक्स का निर्माण करता है.

पार्ले जी बिस्किट के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

पार्ले जी बिस्किट में ग्लूकोज होता है, जो ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत माना जाता है. यह बिस्किट विशेष रूप से बच्चों के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है.

क्या पार्ले जी बिस्किट का निर्यात होता है?

हां, पार्ले जी बिस्किट सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी निर्यात किया जाता है और वैश्विक स्तर पर यह काफी लोकप्रिय है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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