Oil Price Today: मिडिल ईस्ट से आ रही शांति की खबरों के बीच इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद, गुरुवार को तेल की कीमतें नीचे आ गईं. इस गिरावट की मुख्य वजह इस्राइल और लेबनान के बीच हुआ एक सशर्त सीजफायर समझौता है. इस बदलाव से ब्रेंट क्रूड गिरकर 97 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 95 से 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
क्या तेल की कीमतें सच में कम होंगी?
इस हफ्ते के शुरुआती तीन दिनों में सप्लाई रुकने के डर से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% का उछाल आया था. लेकिन अब इस्राइल, लेबनान और अमेरिका के एक साझा बयान के मुताबिक, अगर ईरान समर्थित हिजबुल्लाह अपनी तरफ से हमले पूरी तरह रोक देता है, तो यह सीजफायर लागू रहेगा. इस समझौते से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, जिससे बाजार को थोड़ी राहत मिली है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता कब खुलेगा?
पूरी दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते से गुजरता है. अमेरिका और ईरान के बीच इस रास्ते को फिर से खोलने और अपनी आपसी शांति को दो महीने बढ़ाने पर सहमति तो बनी है, लेकिन आखिरी शर्तों पर बातचीत अभी भी अटकी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जैसे ही ईरान दुश्मनी खत्म करने के समझौते पर दस्तखत करेगा और समुद्री बारूदी सुरंगों (mines) को साफ कर दिया जाएगा, यह रास्ता तुरंत खुल जाएगा. दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है, और अगर बेरूत पर हमले जारी रहे, तो वे इस्राइल को निशाना बनाएंगे.
क्या दुनिया में तेल का स्टॉक खत्म हो रहा है?
भले ही शांति की बातचीत चल रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक है. अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ओकलाहोमा के कुशिंग (Cushing) हब में कच्चे तेल का स्टॉक लगातार छठे हफ्ते गिरा है. अब यह स्टॉक अपने न्यूनतम ऑपरेटिंग लेवल (minimum operating level) के बेहद करीब पहुंच चुका है. इसका मतलब है कि दुनिया के पास तेल का बैकअप बहुत कम बचा है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई का संकट बढ़ सकता है.
अमेरिकी राजनीति में क्या हलचल है?
इस बीच, अमेरिका में पांच महीने बाद होने वाले मिड-टर्म चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. वहां की रिपब्लिकन नेतृत्व वाली प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने ईरान के साथ युद्ध को रोकने के पक्ष में मतदान किया है. हालांकि, इस फैसले से अमेरिकी सैन्य हमले तुरंत नहीं रुकेंगे, क्योंकि इसे अभी सीनेट से पास होना बाकी है और 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के कानूनी प्रावधानों पर भी विवाद है. लेकिन इससे साफ है कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप की पार्टी के भीतर भी इस युद्ध को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं.
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