Oil Price Today: क्रूड ऑयल पहुंचा $97 के पार, अब महंगाई छुएगी आसमान

Oil Price Today: इजरायल और ईरान के बीच हुए हवाई हमलों से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं. इससे अब पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा हो गया है.

Oil Price Today: इजरायल और ईरान के बीच हुए ताजा हवाई हमलों ने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है. इस टकराव के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 4 फीसदी से भी ज्यादा उछल गई हैं. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि शांति समझौता ज्यादा दूर नहीं है, वहीं दूसरी तरफ इस नए विवाद ने तेल सप्लाई करने वाले सबसे जरूरी समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का डर बढ़ा दिया है. 

तेल की कीमतों में कितना आया उछाल?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखा है:

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): इसकी कीमत 4.42 डॉलर (4.47%) बढ़कर 97.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है. 
  • अमेरिकी क्रूड (U.S. Crude): यह भी 4.07 डॉलर (4.50%) की तेजी के साथ 94.61 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. 

दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार को तेल की कीमतें गिरी थीं क्योंकि लोगों को लगा था कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने वाला है. फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जो मार्च के पीक (चरम) के दौरान 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची थीं. 

अचानक क्यों बिगड़े हालात?

रविवार को ईरान ने इजरायली ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. यह कार्रवाई इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में थी. इसके बाद इजरायल ने पलटवार करते हुए ईरान के एक पेट्रोकेमिकल प्लांट को निशाना बनाया. ट्रंप ने इजरायल से संयम बरतने की अपील की थी, लेकिन इजरायल नहीं रुका. ईरान की मुख्य मांग है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते से पहले इजरायल और लेबनान के बीच पूरी तरह से सीजफायर होना चाहिए. 

ओपेक प्लस (OPEC+) का क्या है फैसला?

इस संकट के बीच तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस ने जुलाई में रोजाना 1,88,000 बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. पिछले चार महीनों में यह लगातार चौथी बढ़ोतरी है. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रही नाकेबंदी की वजह से ओपेक देश तय टारगेट के मुताबिक तेल सप्लाई करने में काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. 

आपकी जेब और लोन की ईएमआई पर क्या असर होगा?

महंगे कच्चे तेल ने अमेरिका सहित पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है. अमेरिका में महंगे फ्यूल के कारण लोगों का बजट बिगड़ चुका है, जिससे मई में कंज्यूमर सेंटिमेंट (उपभोक्ता भरोसा) अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया. 

इसके अलावा, शुक्रवार को आए अमेरिका के मजबूत जॉब डेटा (रोजगार के आंकड़ों) ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को खत्म कर दिया है. नए फेडरल रिजर्व चीफ ‘केविन वॉर्श’ 16-17 जून को अपनी पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे. दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सेश की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरल रिजर्व साल 2026 तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और लोन सस्ता होने (ब्याज दर घटने) का इंतजार अब 2027 तक खिंच सकता है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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