Nuclear Power Import Duty: भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा (nuclear power) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 के बीच परमाणु ऊर्जा से जुड़े सामानों के इंपोर्ट पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) को पूरी तरह माफ कर दिया है. यह फैसला पुरानी तारीख से लागू किया गया है, जिससे कंपनियों को भारी राहत मिली है.
क्या इस फैसले से बिजली सस्ती होगी?
जी हां, सरकार का मानना है कि परमाणु प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर ड्यूटी खत्म करने से प्रोजेक्ट की लागत घटेगी. इससे न केवल बिजली प्रोडक्शन सस्ता होगा, बल्कि कंज्यूमर्स के लिए भी इसके रेट कम होने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.78 GW से बढ़ाकर 100 GW तक पहुंचाना है.
प्राइवेट कंपनियां क्यों खुश हैं?
दिसंबर 2025 में आए ‘शांति एक्ट’ (SHANTI Act) के बाद अब प्राइवेट कंपनियां भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम कर सकती हैं. ड्यूटी माफी के इस फैसले से सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ प्राइवेट प्लेयर्स के लिए भी काम करना आसान और सस्ता हो गया है. सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में आएं ताकि ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य हासिल हो सके.
किन कंपनियों को होगा फायदा?
इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को होगा जो परमाणु संयंत्रों के लिए जरूरी उपकरण बनाती हैं या इंपोर्ट करती हैं. इसमें सरकारी संस्था ‘न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया’ (NPCIL) के अलावा लिस्टेड कंपनियों जैसे- MTAR टेक्नोलॉजीज, वालचंदनगर इंडस्ट्रीज, BHEL और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी कंपनियों पर इन्वेस्टर्स की नजरें टिकी हैं.
यह फैसला भारत के ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में परमाणु बिजली को मुख्यधारा की ऊर्जा बनाने में मदद करेगा.
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