विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए सरकार का बड़ा तोहफा, सरकारी बॉन्ड्स पर अब नहीं लगेगा कैपिटल गेन्स टैक्स

FPI Capital Gains Tax: पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने FPIs के लिए सरकारी बॉन्ड्स पर टैक्स खत्म किया. विदेशी इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए अध्यादेश के जरिए लिया बड़ा फैसला.

FPI Capital Gains Tax: भारत को दुनिया भर के इन्वेस्टर्स के लिए पसंदीदा जगह बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया है कि अब विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) को भारत के सरकारी बॉन्ड्स (Government Securities) में इंवेस्ट करने पर कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना होगा. सरकार ने इस फैसले को तुरंत लागू करने के लिए ऑर्डिनेंस यानी अध्यादेश का रास्ता चुना है, ताकि बिना किसी देरी के विदेशी इन्वेस्टर्स को यह राहत दी जा सके. सूत्रों के मुताबिक, इसी हफ्ते इसकी आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दी जाएगी.

सरकार ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया?

वर्तमान में दुनिया भर के शेयर और बॉन्ड बाजारों में काफी हलचल है. खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इस संकट के कारण विदेशी इन्वेस्टर्स उभरते हुए बाजारों (Emerging Markets) में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं. ऐसे माहौल में भारत सरकार चाहती है कि विदेशी पैसा देश से बाहर न जाए, बल्कि और ज्यादा इनवेस्टमेंट भारत में आए. टैक्स हटाने से भारतीय सरकारी बॉन्ड्स पर मिलने वाला रिटर्न विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए और ज्यादा फायदेमंद हो जाएगा, जिससे वे भारत में जमकर इंवेस्ट करेंगे.

पुराना टैक्स नियम क्या था?

अभी तक के टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर कोई विदेशी इन्वेस्टर्स भारत के लिस्टेड शेयर्स या बॉन्ड्स को 12 महीने (एक साल) से ज्यादा समय तक अपने पास रखता था, तो उसे मुनाफा होने पर 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता था. विदेशी इन्वेस्टर्स लंबे समय से इस टैक्स को हटाने की मांग कर रहे थे, क्योंकि उनके लिए यह टैक्स भारत में इनवेस्टमेंट करने के रास्ते में एक बड़ी रुकावट बना हुआ था. अब सरकारी बॉन्ड्स से इस टैक्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.

इस फैसले से भारत को क्या फायदा होगा?

टैक्स हटने से भारतीय इकोनॉमी को कई सीधे फायदे होंगे:

  • रुपये को मजबूती: जब विदेशी इन्वेस्टर्स भारत के सरकारी बॉन्ड्स खरीदेंगे, तो देश में डॉलर का इनफ्लो (आवक) बढ़ेगा. इससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा.
  • ब्याज दरों पर नियंत्रण: सरकार को अपनी योजनाओं के लिए बाजार से जो कर्ज लेना पड़ता है, उसकी लागत (Borrowing Costs) को कम रखने और मैनेज करने में इस फैसले से बड़ी मदद मिलेगी.
  • आर्थिक सुरक्षा कवच: पश्चिम एशिया के संकट से भारतीय इकोनॉमी पर जो बुरा असर पड़ सकता था, यह फैसला उसके खिलाफ एक ढाल की तरह काम करेगा.

आगे सरकार का क्या प्लान है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह टैक्स छूट सिर्फ एक शुरुआत है. सरकार यहीं नहीं रुकने वाली है. आने वाले दिनों में विदेशी पूंजी को भारत की तरफ आकर्षित करने के लिए कुछ और बड़े कदमों का ऐलान किया जा सकता है. सरकार का सीधा और साफ मकसद यह है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी भारत की इकोनॉमी को मजबूत, सुरक्षित और रफ्तार से आगे बढ़ने वाला बनाया जा सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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