इसी सोच के साथ केंद्र सरकार देश में Vehicle-to-Vehicle (V2V) Communication System लागू करने की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें नई गाड़ियों में V2V सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
V2V सिस्टम क्या है और कैसे करेगा काम?
V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication ऐसी तकनीक है, जिसमें आसपास चल रही गाड़ियां वायरलेस तरीके से एक-दूसरे के साथ जरूरी जानकारी शेयर करेंगी. इसमें गाड़ी की स्पीड, दिशा, लोकेशन और एक्सेलरेशन जैसी जानकारी शामिल होगी. इसका फायदा यह होगा कि ड्राइवर को उन खतरों की भी पहले से चेतावनी मिल सकेगी जो अभी उसकी नजर में नहीं हैं. उदाहरण के लिए:
- आगे कई गाड़ियों बाद अचानक ब्रेक लगना
- कोई वाहन गलत दिशा से आना
- इमरजेंसी वाहन का पास आना
- असुरक्षित लेन बदलना
सरकार का मानना है कि यह तकनीक मौजूदा ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स को और बेहतर बनाएगी.
कब से लागू होगा नया नियम?
मंत्रालय ने दो चरणों में इसे लागू करने का प्रस्ताव दिया है. यह नियम L, M और N कैटेगरी के वाहनों पर लागू होगा, जिनमें दोपहिया, पैसेंजर और कमर्शियल वाहन शामिल हैं.
| तारीख | क्या होगा? |
| 1 अक्टूबर 2027 | जिन वाहनों में V2V सिस्टम होगा, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा. |
| 1 अक्टूबर 2028 | इन सभी नई गाड़ियों में AIS-230 के मुताबिक V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. |
सरकार का कहना है कि यह समय ऑटो कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को तैयारी का मौका देने के लिए रखा गया है.
AIS-230 क्या है?
AIS-230 भारत का नया तकनीकी मानक है, जो V2V सिस्टम के लिए जरूरी नियम तय करता है. इसमें तकनीक के प्रदर्शन से लेकर साइबर सुरक्षा तक कई पहलुओं को शामिल किया गया है.
इस मानक में मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया है:
- रेडियो और फ्रीक्वेंसी परफॉर्मेंस
- GNSS आधारित लोकेशन सिस्टम
- इलेक्ट्रिकल और पावर सप्लाई परफॉर्मेंस
- इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी
- साइबर सिक्योरिटी और सुरक्षित कम्युनिकेशन
- सड़क सुरक्षा से जुड़े परफॉर्मेंस मानक
ड्राइवर को क्या फायदा मिलेगा?
AIS-230 के तहत कई सेफ्टी फीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जिन्हें जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकेगा.
इनमें शामिल हैं:
- इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट
- फॉरवर्ड कॉलिजन वॉर्निंग
- रॉन्ग-वे ड्राइविंग अलर्ट
- इमरजेंसी व्हीकल अलर्ट
मंत्रालय के मुताबिक, इन फीचर्स का मकसद ड्राइवर को समय रहते खतरे की जानकारी देना और सड़क हादसों का जोखिम कम करना है.
फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के रूप में सार्वजनिक किया गया है. मंत्रालय अगले 30 दिनों तक लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगेगा. इसके बाद सुझावों की समीक्षा कर अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. अगर यह लागू होता है, तो यह भारत में कनेक्टेड और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक अहम कदम माना जाएगा.
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