New labour Code: अभी तक अधिकांश कंपनियां टैक्स बचाने के लिए ‘बेसिक सैलरी’ को कम रखती थीं और भत्तों (Allowances) को 70% से 80% तक बढ़ा देती थीं. लेकिन नए नियमों के बाद अब भत्ते कुल CTC के 50% से ज्यादा नहीं हो सकेंगे.
इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर ?
जब बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो आपकी सैलरी से कटने वाला प्रोविडेंट फंड (PF) का हिस्सा भी बढ़ जाता है, क्योंकि PF की गणना बेसिक पे के आधार पर होती है.
- गणित: यदि आपकी बेसिक सैलरी पहले ₹20,000 थी और अब बढ़कर ₹30,000 हो गई है, तो आपका 12% PF योगदान भी ₹2,400 से बढ़कर ₹3,600 हो जाएगा.
- नतीजा: आपके खाते में हर महीने आने वाली नकद राशि (Take-home salary) कुछ कम हो जाएगी.
रिटायरमेंट फंड में जबरदस्त इजाफा
भले ही हर महीने मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम दिखे, लेकिन भविष्य के लिए यह एक बेहतरीन खबर है.
EPF योगदान: कंपनी का योगदान भी आपके PF खाते में बढ़ जाएगा, जिससे रिटायरमेंट के समय आपके पास एक बड़ा फंड जमा होगा.
ग्रेच्युटी (Gratuity): ग्रेच्युटी की कैल्क्युलेशन भी बेसिक सैलरी पर होती है. बेसिक बढ़ने से आपकी ग्रेच्युटी की रकम में भी भारी बढ़ोतरी होगी, जो नौकरी छोड़ने या रिटायर होने पर मिलती है. ग्रेच्युटी कैलकुलेटर के लिए यहां क्लिक करें
कंपनियों के लिए बढ़ेगा खर्च
इस नियम से कंपनियों की ‘स्टाफ कॉस्ट’ बढ़ जाएगी, क्योंकि उन्हें अब कर्मचारी के PF और ग्रेच्युटी के लिए अपनी जेब से अधिक पैसा डालना होगा. कंपनियां अपनी बढ़ती लागत को बैलेंस करने के लिए भविष्य में नए कर्मचारियों के CTC स्ट्रक्चर को दोबारा डिजाइन कर सकती हैं.
| सैलरी कंपोनेंट | पुराना स्ट्रक्चर (अनुमानित) | नया स्ट्रक्चर (1 अप्रैल से) | प्रभाव |
| बेसिक सैलरी | CTC का 30-40% | CTC का 50% (अनिवार्य) | बढ़ा |
| PF योगदान | कम (बेसिक कम होने से) | ज्यादा (बेसिक बढ़ने से) | बढ़ा |
| इन-हैंड सैलरी | ज्यादा | थोड़ी कम | घटा |
| रिटायरमेंट फंड | कम | काफी ज्यादा | बढ़ा |
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