डेढ़ साल की उम्र में 240 करोड़ का मालिक बना नारायण मूर्ति का पोता, डिविडेंड से करोड़ों की कमाई

Narayana Murthy: महज डेढ़ साल की उम्र में नारायण मूर्ति के पोते एकाग्रह रोहन मूर्ति को इन्फोसिस के 240 करोड़ रुपये के शेयर उपहार में मिले, जिससे उन्हें 6.5 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ. इससे वह भारत के सबसे कम उम्र के करोड़पतियों में शामिल हो गए हैं. इन्फोसिस द्वारा घोषित डिविडेंड से मूर्ति परिवार को करोड़ों रुपये का लाभ हुआ.

Narayana Murthy: इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के पोते एकाग्रह रोहन मूर्ति आजकल चर्चाओं में हैं. महज डेढ़ साल की उम्र में उन्होंने ऐसी संपत्ति हासिल की है, जो बहुतों को जीवनभर मेहनत के बाद भी नहीं मिलती. एकाग्रह को अपने दादा से उपहार स्वरूप करोड़ों रुपयों के शेयर मिले हैं, जिससे वह भारत के सबसे कम उम्र के करोड़पतियों में शामिल हो गए हैं.

गिफ्ट में मिले 240 करोड़ रुपये के शेयर

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एकाग्रह रोहन मूर्ति और अपर्णा कृष्णन के पुत्र हैं. उन्हें केवल चार महीने की उम्र में ही नारायण मूर्ति ने इन्फोसिस के 15 लाख शेयर गिफ्ट किए थे. उस समय इनकी कुल कीमत 240 करोड़ रुपये के करीब थी. इसके परिणामस्वरूप एकाग्रह को अब कंपनी में 0.04% हिस्सेदारी प्राप्त है.

डिविडेंड से कमाए 6.5 करोड़ रुपये

इन्फोसिस ने वित्तीय वर्ष 2024 में प्रति शेयर 43 रुपये का डिविडेंड घोषित किया, जिसके अनुसार एकाग्रह को 6.5 करोड़ रुपये का लाभ हुआ. इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी रकम का डिविडेंड पाना, उन्हें भारत के सबसे युवा उच्च नेट वर्थ व्यक्तियों की सूची में ला खड़ा करता है.

परिवार को भी मिला बड़ा लाभ

नारायण मूर्ति को उनके 1.5 करोड़ शेयरों से 65 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला. उनकी पत्नी सुधा मूर्ति को 9.5 करोड़ शेयर से 410 करोड़ रुपये का लाभ हुआ. उनके बेटे रोहन मूर्ति को 6 करोड़ शेयरों पर 261.5 करोड़ रुपये और बेटी अक्षता मूर्ति (जो ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं) को 3.8 करोड़ शेयरों पर 167 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ.

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इन्फोसिस के अन्य दिग्गजों को भी हुआ बड़ा लाभ

चेयरमैन नंदन नीलेकणि को 4 करोड़ शेयरों से 175 करोड़ रुपये और को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन को 3.2 करोड़ शेयरों से 137 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. इस तरह इन्फोसिस ने कुल 2,330 करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में वितरित किए. एकाग्रह की यह उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे विरासत और निवेश की ताकत से अगली पीढ़ी की आर्थिक स्थिति प्रारंभिक अवस्था से ही सशक्त बन सकती है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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