नेफेड की बिकवाली की अफवाह से टूटा बाजार, गिर गए तेल-तिलहन के दाम

NAFED Selling: नेफेड की ओर से सोयाबीन बिक्री की अफवाह के चलते तेल-तिलहन बाजार में सरसों, पामतेल, पामोलीन और बिनौला तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, मूंगफली और सोयाबीन तेल-तिलहन की कीमतें स्थिर रहीं.

NAFED Selling: देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब नेफेड (NAFED) की ओर से सोयाबीन बेचने की अफवाहें तेज हो गईं. इन अफवाहों के चलते सरसों, कच्चा पामतेल (CPO), पामोलीन और बिनौला तेल के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, मूंगफली और सोयाबीन तेल-तिलहन की कीमतें मंडियों में कम आवक के कारण स्थिर बनी रहीं.

सोयाबीन बिक्री की आशंका से बाजार में घबराहट

सूत्रों के अनुसार, आगामी 21 अप्रैल से नेफेड द्वारा सोयाबीन की बिक्री शुरू किए जाने की चर्चाओं ने बाजार में घबराहट फैला दी है. इस अफवाह का सीधा असर किसानों और कारोबारियों पर पड़ा है. यदि सरकार सच में यह कदम उठाती है, तो यह पहले से ही दबाव में चल रहे सोयाबीन किसानों के लिए घातक हो सकता है.

किसानों का टूटता भरोसा

तेल-तिलहन बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर सरकार हाजिर बाजार में कम दाम पर बिक्री शुरू करती है, तो इससे किसानों का सरकारी खरीद पर बना भरोसा टूट सकता है. पहले आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सूरजमुखी और मूंगफली की खेती प्रमुख थी, लेकिन सरकारी नीतियों के चलते वहां खेती का पैटर्न बदल गया. आज सूरजमुखी का एमएसपी भले ही 7,200 रुपये प्रति क्विंटल हो, लेकिन किसान उसकी खेती की ओर लौटने को तैयार नहीं हैं.

सोपा ने जताई आपत्ति

सोयाबीन प्रोसेसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने भी सरकार से अपील की है कि वह सोयाबीन की बिक्री रोक दे, क्योंकि इससे किसानों को नुकसान होगा. संगठन ने कहा कि अभी हाजिर दाम पहले से ही नीचे चल रहे हैं और सरकार की बिक्री स्थिति को और बदतर बना देगी.

सरसों के दाम में 100 रुपये की गिरावट

सरसों के दामों में भारी गिरावट देखने को मिली। कई जगहों पर कच्ची घानी मिलों ने सरसों की कीमतों में 100 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की. यह कीमतें पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 4-5% नीचे थीं। इस खबर के बाद दाम और टूट गए.

पाम और पामोलीन की भी बिक्री मुश्किल

वर्तमान में सोयाबीन डीगम की बंदरगाह पर लागत करीब 96 रुपये प्रति किलो है, लेकिन बाजार में इसकी खपत नहीं हो रही. 93.50 रुपये प्रति किलो के भाव पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में जब सॉफ्ट ऑयल की खपत नहीं हो रही, तो पाम और पामोलीन की बिक्री और कठिन हो जाती है.

मूंगफली के दाम पर भी असर

गुजरात में सरकार मूंगफली को एमएसपी से 10-15% कम दाम पर बेच रही है. पहले से ही हाजिर बाजार में मूंगफली का दाम MSP से 17-18% नीचे है. इस कारण किसान मंडियों में अपनी आवक कम ला रहे हैं, जिससे मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने हुए हैं.

थोक और खुदरा बाजार में अंतर

थोक बाजार में भले ही मूंगफली तेल के दाम गिरे हों, लेकिन खुदरा बाजार में यह अभी भी 195 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है. इस अंतर से सवाल उठता है कि थोक में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुंच रहा है.

तेल-तिलहन आयात पर बढ़ती निर्भरता

मलेशिया जैसे देशों से आयात के कारण भारत पाम और पामोलीन पर अत्यधिक निर्भर हो गया है. घरेलू उत्पादन की गति उतनी तेज़ नहीं रही, जितनी खपत की मांग बढ़ी है। इस वजह से देश निरंतर आयात पर आश्रित होता जा रहा है.

बाजार की मौजूदा हालत पर नजर

सोयाबीन किसान पहले से ही दबाव में हैं और वर्तमान स्थिति ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. अब सबकी नजर सोमवार को सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है—क्या बिक्री का फैसला वापस होगा या आगे बढ़ेगा?

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तेल-तिलहन के ताजा भाव इस प्रकार रहे

सरसों तिलहन: 6,225–6,325 रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली: 5,725–6,100 रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात): 14,150 रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली रिफाइंड तेल: 2,245–2,545 रुपये प्रति टिन
सरसों तेल दादरी: 12,900 रुपये प्रति क्विंटल
सरसों पक्की घानी: 2,335–2,435 रुपये प्रति टिन
सरसों कच्ची घानी: 2,335–2,460 रुपये प्रति टिन
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली: 13,400 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर: 13,250 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला: 9,350 रुपये प्रति क्विंटल
सीपीओ एक्स-कांडला: 12,225 रुपये प्रति क्विंटल
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा): 13,350 रुपये प्रति क्विंटल
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली: 13,600 रुपये प्रति क्विंटल
पामोलिन एक्स-कांडला: 12,400 रुपये प्रति क्विंटल (बिना GST)
सोयाबीन दाना: 4,550–4,600 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन लूज: 4,250–4,300 रुपये प्रति क्विंटल

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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