टाटा संस के चेयरमैन N Chandrasekaran ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे. इसके बाद वह दोबारा चेयरमैन बनने के लिए नाम नहीं देंगे. उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 18 अगस्त 2026 को होने वाली है.
चंद्रशेखरन की विदाई के साथ उनके करियर, कमाई और निजी संपत्ति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. FY26 में उन्हें टाटा संस से कुल ₹158.66 करोड़ का रिम्यूनरेशन मिला, जिसमें अधिकतर रकम प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन की थी. आइए एक नजर उनकी पूरी नेट वर्थ पर डालते हैं.
N Chandrasekaran को FY26 में कितनी सैलरी मिली?
टाटा संस की लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में चंद्रशेखरन का कुल रिम्यूनरेशन ₹158.66 करोड़ रहा. FY25 में यह रकम ₹155.81 करोड़ थी.
उनकी कमाई को इस तरह समझ सकते हैं:
| कमाई का हिस्सा | FY26 रकम |
| सैलरी और बेनिफिट्स | ₹17.97 करोड़ |
| प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन | ₹140.69 करोड़ |
| कुल रिम्यूनरेशन | ₹158.66 करोड़ |
यानी ₹158.66 करोड़ को पूरी तरह सैलरी कहना सही नहीं होगा. इसमें करीब ₹140.69 करोड़ प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन था. पिछले पांच साल में उन्हें करीब ₹685 करोड़ का रिम्यूनरेशन मिला है.
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N Chandrasekaran की नेट वर्थ कितनी है?
चंद्रशेखरन की निजी नेट वर्थ को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग अनुमान दिए गए हैं. उपलब्ध रिपोर्ट्स के आधार पर उनकी संपत्ति करीब $100-$150 मिलियन यानी लगभग ₹950 करोड़ से ₹1,400 करोड़ आंकी गई है. हालांकि, उनकी सही नेट वर्थ की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसलिए इन आंकड़ों को केवल अनुमान के तौर पर देखना चाहिए. मुंबई में उनका करीब ₹98 करोड़ का डुप्लेक्स घर भी चर्चा में रहा है. यह घर मुकेश अंबानी के एंटीलिया के पास बताया जाता है.
TCS से Tata Sons तक कैसे पहुंची उनकी कहानी?
चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा ग्रुप जॉइन किया था. उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में काम करते हुए तेजी से करियर बनाया और 2009 में TCS के CEO बने. 2016 में वह टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में रतन टाटा के बाद टाटा संस के चेयरमैन बने. उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, एविएशन और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया. इसी दौरान टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया का अधिग्रहण भी पूरा किया.
Chandrasekaran Tata Sons से क्यों हट रहे हैं?
उनका इस्तीफा 18 अगस्त की टाटा संस AGM से पहले आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके बोर्ड में बने रहने को लेकर पिछले कुछ समय से अनिश्चितता थी. टाटा ट्रस्ट्स के साथ भी मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है.
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा. इसलिए इस्तीफे के बावजूद वह तुरंत पद से बाहर नहीं होंगे. उनके फैसले के बाद अब टाटा संस में अगली लीडरशिप को लेकर भी लोगों की नजर रहेगी.
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