CNG-PNG Price Hike : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है. महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है. इ
सके साथ ही, पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचने वाली घरेलू PNG के दाम भी 50 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) बढ़ा दिए गए हैं. गैस की ये नई दरें 29-30 मई की आधी रात से लागू हो चुकी हैं. चिंता की बात यह है कि पिछले महज 15 दिनों के भीतर ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले 13-14 मई को भी गैस की कीमतों में ₹2 का इजाफा किया गया था.
आपके शहर में अब क्या हैं नए दाम?
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सीएनजी और पीएनजी की कीमतें इस प्रकार पहुंच गई हैं.
- मुंबई में CNG: अब ₹84 प्रति किलो से बढ़कर ₹86 प्रति किलो हो गई है.
- मुंबई में घरेलू PNG: अब बढ़कर ₹52 प्रति SCM हो गई है.
- दिल्ली-एनसीआर में भी गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने हाल ही में 26 मई को सीएनजी के दाम ₹2 बढ़ाए थे. ईरान संकट के बीच दिल्ली में पिछले दो हफ्तों के भीतर 4 बार सीएनजी महंगी हो चुकी है.
क्यों बढ़ रहे हैं गैस के दाम?
महानगर गैस लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे दो मुख्य कारण जिम्मेदार हैं.
- घरेलू गैस की कमी: देश के भीतर मिलने वाली घरेलू गैस के आवंटन (Allocation) में कमी आई है, जिसकी वजह से कंपनियों को महंगी विदेशी गैस (बाहरी स्रोतों) पर निर्भर होना पड़ रहा है.
- कमजोर रुपया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट के कारण गैस का आयात (Import) काफी महंगा हो गया है, जिससे कुल लागत बढ़ गई है.
एमजीएल (MGL) का दावा है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद नेचुरल गैस अब भी बाजार में सबसे किफायती ईंधनों में से एक है. मुंबई में मौजूदा पेट्रोल की कीमतों की तुलना में सीएनजी के इस्तेमाल से लगभग 45% और डीजल के मुकाबले करीब 12% की बचत होती है.
जेब पर दोहरी मार: ₹2 से ₹3 किराया बढ़ाने की मांग
सीएनजी के दाम बढ़ते ही मुंबई के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. यूनियनों का कहना है कि गैस महंगी होने से उनकी ‘ऑपरेटिंग कॉस्ट’ (गाड़ी चलाने का खर्च) बढ़ गई है, इसलिए वे किराए में ₹2 से ₹3 की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है, तो रोज सफर करने वाले आम यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा.
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