LPG के लिए विदेशों पर कम होगी निर्भरता, सरकार ने 21 कंपनियों को दिया रोज का टारगेट

LPG संकट से निपटने के लिए सरकार ने 21 रिफाइनरी और कंपनियों के उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं. जानिए किसे कितनी LPG बनानी होगी.

देश में LPG की सप्लाई को लेकर सरकार ने अहम कदम उठाया है. पश्चिम एशिया संकट के दौरान इम्पोर्ट में आई रुकावट से सबक लेते हुए पहली बार 21 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम लक्ष्य तय किए गए हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में रोजाना कुल 63,810 टन LPG उत्पादन की क्षमता तय की है. यह 2025-26 में देश के घरेलू LPG उत्पादन से दोगुने से भी ज्यादा है और रोज की खपत का करीब 70 फीसदी है.

सरकार ने ऐसा क्यों किया?

भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से मंगाता है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश में 3.32 करोड़ टन LPG की खपत हुई. इसमें करीब 1.31 करोड़ टन LPG देश में बनी, जबकि 2.13 करोड़ टन यानी 64 फीसदी से ज्यादा जरूरत आयात से पूरी हुई.

पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई प्रभावित होने पर भारत के लिए LPG की उपलब्धता चुनौती बन गई थी. इसके बाद सरकार ने रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल्स में इस्तेमाल होने वाली कुछ स्ट्रीम को LPG उत्पादन में लगाने का निर्देश दिया था. संकट के दौरान घरेलू उत्पादन करीब 55,000 टन रोज तक पहुंच गया था.

किन कंपनियों को कितना LPG बनाना होगा?

नए आदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं.

कंपनी/क्षेत्ररोजाना उत्पादन लक्ष्य
18 सरकारी रिफाइनरी31,470 टन
Reliance की Jamnagar DTA रिफाइनरी18,000 टन
Nayara Energy4,480 टन
ONGC, GAIL जैसी अपस्ट्रीम कंपनियां6,460 टन
कुल63,810 टन

Reliance की 35.2 मिलियन टन सालाना वाली केवल-निर्यात रिफाइनरी के लिए कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया है.

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जरूरत पड़ने पर क्या होगा?

ये उत्पादन सीमा हर समय लागू नहीं रहेगी. जब LPG की सप्लाई में कमी होगी, तब सरकार कंपनियों को तय मात्रा और तय अवधि तक उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकेगी. इसका मकसद घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता, सही तरीके से वितरण और उचित कीमत पर सप्लाई बनाए रखना है.

कंपनियों को LPG के स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने को भी कहा गया है. जहां तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव हो, वहां नाफ्था को LPG में बदलने और FCC यूनिट में अपग्रेड जैसे उपायों से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी करनी होगी.

क्या इससे आगे LPG की कमी कम होगी?

सरकार इस उत्पादन शेड्यूल की समीक्षा हर छह महीने में करेगी. हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इसमें नए रिफाइनरी या अपस्ट्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ी अतिरिक्त क्षमता को शामिल किया जा सकेगा.

यानी भविष्य में अगर विदेशों से LPG की सप्लाई फिर प्रभावित होती है, तो सरकार के पास घरेलू उत्पादन बढ़ाने का पहले से तय सिस्टम मौजूद रहेगा. इससे पश्चिम एशिया संकट जैसी स्थिति में घरेलू LPG की सप्लाई पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.

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By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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