पश्चिम एशिया संकट से सबक लेते हुए सरकार देश में एलपीजी और नेचुरल गैस का रिजर्व तैयार करने की योजना बना रही है. इसके लिए करीब 42 अरब डॉलर की योजना तैयार की जा रही है. इसी के साथ सरकार घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर मामूली अतिरिक्त शुल्क लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है.
सूत्रों के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय ने रसोई गैस पर 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम और प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में करीब 18 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं, पीएनजी के घरेलू बिल में लगभग 2 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
सरकार गैस पर अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाना चाहती है?
सरकार इस योजना के जरिए भविष्य में गैस की सप्लाई को लेकर किसी बड़े संकट से बचने की तैयारी कर रही है. पश्चिम एशिया में तनाव और ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद आयातित ईंधन पर भारत की निर्भरता का असर सामने आया है. प्रस्तावित शुल्क से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल गैस का रणनीतिक भंडार तैयार करने में किया जाएगा. यानी जरूरत पड़ने पर देश के पास इस्तेमाल करने के लिए गैस का सुरक्षित स्टॉक मौजूद रहेगा.
फिलहाल एलपीजी को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. हालांकि, सरकार करीब दो महीने की एलपीजी जरूरत और लगभग डेढ़ महीने की एलएनजी जरूरत पूरी करने लायक स्टॉक तैयार करने की दिशा में काम कर रही है.
हर साल 1.5 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी क्यों?
सरकार का अनुमान है कि प्रस्तावित शुल्क से हर साल करीब 1.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं. मौजूदा खपत को देखें तो एलपीजी पर लगाए जाने वाले शुल्क से करीब 460 मिलियन डॉलर और पीएनजी पर शुल्क से लगभग 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है. यानी सरकार इस रकम का इस्तेमाल लंबे समय के लिए गैस भंडारण और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में कर सकती है.
अगले 10 साल में कितना गैस भंडार बनाने की योजना है?
सरकार अगले 10 साल में इस योजना को पूरा करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए करीब 42 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है. इस रकम का इस्तेमाल नए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और गैस का भंडार बढ़ाने के लिए किया जाएगा. अनुमान के मुताबिक देश को करीब 90 लाख टन एलएनजी और 40 लाख टन एलपीजी के भंडारण की जरूरत होगी.
अभी भारत के पास कितना रणनीतिक भंडार है?
फिलहाल भारत के पास सरकार के स्वामित्व वाला करीब 53.3 लाख टन रणनीतिक कच्चे तेल का भंडारण है. इसके अलावा 65 लाख टन की क्षमता वाले भंडार का निर्माण किया जा रहा है. हालांकि, एलपीजी और एलएनजी के लिए अलग से समर्पित रणनीतिक भंडार की कमी है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक और उपभोक्ता है और अपनी कच्चे तेल की करीब 90 फीसदी जरूरत विदेशों से खरीदकर पूरी करता है.
ईरान पर अमेरिका-ईरान युद्ध और उसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई बाधाओं से ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई थी. आयात में रुकावट से लागत बढ़ी और भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता भी सामने आई. इसी अनुभव के बाद सरकार ने गैस के रणनीतिक भंडार की योजना तैयार की है.
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