हीरे के बाद अब लैब में बन रहा है सोना, क्या सस्ते हो जाएंगे गहने?

Lab-Grown Gold: क्या लैब में बना सोना असली होता है? जानिए कैसे साइंटिस्ट्स पारा और प्लैटिनम से सोना बना रहे हैं और यह बाजार में मिलने वाले सोने से कितना अलग और महंगा है.

Lab-Grown Gold: आज के दौर में जब सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, हर किसी के मन में यह सवाल आता है कि अगर हीरे लैब में बन सकते हैं, तो सोना क्यों नहीं? हाल ही में लैब-ग्रोन गोल्ड (Lab-grown Gold) को लेकर चर्चा तेज हो रही है. आइए जानते हैं कि क्या सच में साइंस हमें लैब में बना सोना दे सकता है. 

आखिर क्या होता है लैब-ग्रोन गोल्ड?

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, लैब-ग्रोन गोल्ड वह सोना है जिसे खदान से खोदकर निकालने के बजाय साइंटिस्ट्स टेक्निक्स से लैबोरेट्री में तैयार किया जाता है. लेकिन हीरे और सोने के बनने के प्रोसेस में बड़ा अंतर है. हीरा कार्बन से बना एक ढांचा है जिसे दबाव देकर तैयार किया जा सकता है, लेकिन सोना एक ‘एलिमेंट’ है. इसे बनाने के लिए साइंटिस्ट्स को दूसरे मेटल्स (जैसे पारा या प्लैटिनम) के एटम्स (Atoms) को न्यूक्लियर रिएक्टर के जरिए बदलना पड़ता है. 

क्या यह असली सोने जैसा दिखता है?

जी हां, यह पूरी तरह असली सोने की तरह दिखता है. लैब में तैयार सोना केमिकल और फिजिकल फॉर्म से 24 कैरेट के शुद्ध सोने जैसा ही होता है. इसका वजन, चमक और टिकाऊपन बिल्कुल वैसा ही होता है जैसा जमीन से निकले सोने का. अगर आप लैब में बने सोने और खदान वाले सोने को साथ रखेंगे, तो दुनिया का बड़े से बड़ा जौहरी भी बिना मशीनों के इनमें फर्क नहीं बता पाएगा. 

यह बाजार में क्यों नहीं बिक रहा?

भले ही साइंस ने सोना बनाना सीख लिया है, लेकिन इसे बाजार तक लाना फिलहाल मुमकिन नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह है भारी लागत. लैब में मात्र एक ग्राम सोना बनाने का खर्च उसकी असली कीमत से करोड़ों गुना ज्यादा आता है. साथ ही, इस प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाले ‘पार्टिकल एक्सेलेरेटर’ बहुत जटिल होते हैं और इनसे जो सोना निकलता है, वह मात्रा में बहुत कम और कभी-कभी अस्थिर (Unstable) होता है. 

क्या फ्यूचर में सोने के दाम गिरेंगे?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल लैब-ग्रोन गोल्ड, प्राकृतिक सोने का विकल्प नहीं बन सकता है. खदान से निकला सोना आज भी लैब में सोना बनाने से कहीं ज्यादा सस्ता, सुरक्षित और भरोसेमंद है. जहां लैब-ग्रोन हीरे आज मार्केट में छाए हुए हैं, वहीं लैब-ग्रोन गोल्ड अभी केवल एक साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट तक सीमित है. इसलिए इनवेस्टमेंट के नजरिए से भी फिलहाल माइनिंग वाला सोना ही सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद है. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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