ITR में मत करना ऐसी हेरा-फेरी, वरना भरना पड़ेगा दोगुना टैक्स और भारी जुर्माना

ITR Misreporting Penalty: आईटीआर में छोटी सी लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है. जानिए इनकम टैक्स विभाग किन स्थितियों में आप पर 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लगा सकता है.

ITR Misreporting Penalty: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय छोटी सी लापरवाही भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है. भारत में टैक्स कानून अब काफी सख्त हो गए हैं. अगर आप अपनी कमाई को कम करके दिखाते हैं या टैक्स चुकाने में देरी करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आप पर भारी जुर्माना लगा सकता है. मुख्य रूप से दो स्थितियों में पेनल्टी लगती है: पहला, जब आप टैक्स समय पर नहीं भरते (धारा 221) और दूसरा, जब आप अपनी आय की गलत जानकारी देते हैं (धारा 270A). 

कम आय दिखाना और गलत जानकारी देना: क्या है अंतर?

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इनकम टैक्स की धारा 270A के तहत पेनल्टी को दो भागों में बांटा गया है. सरकार यह देखती है कि आपसे गलती अनजाने में हुई है या आपने जानबूझकर टैक्स चोरी की है:

  1. Under-reporting (कम आय दिखाना): अगर आपने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अनजाने में नहीं दिखाया या कैलकुलेशन में गड़बड़ी हो गई, तो इसे ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ माना जाता है. इस स्थिति में आपको बकाया टैक्स का 50% जुर्माना देना होगा. 
  2. Misreporting (गलत जानकारी देना): अगर आप जानबूझकर सबूत मिटाते हैं, फर्जी खर्चे दिखाते हैं या विदेशी निवेश छिपाते हैं, तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है. इसमें जुर्माने की राशि बढ़कर टैक्स का 200% तक हो जाती है. 

पेनल्टी कब और कैसे लगती है?

जब टैक्स अधिकारी आपकी फाइल की जांच (Assessment) करते हैं और उन्हें घोषित आय से ज्यादा कमाई का पता चलता है, तब वे धारा 270A का इस्तेमाल करते हैं. यह तब लागू होता है जब:

  • आपने रिटर्न में कम आय दिखाई हो. 
  • रिटर्न भरा ही न हो, जबकि आपकी आय टैक्स की सीमा से अधिक हो. 
  • पुराने घाटे (Losses) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो ताकि टैक्स न देना पड़े. 

क्या पेनल्टी से बचने का कोई रास्ता है?

कानून ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत भी देता है. यदि आप यह साबित कर देते हैं कि आपके पास आय न दिखाने का कोई ठोस और सही कारण (Bona fide explanation) है और आपने सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए हैं, तो आप जुर्माने से बच सकते हैं. साथ ही, अगर आप टैक्स डिमांड को स्वीकार कर लेते हैं और समय पर भुगतान कर विवाद को आगे नहीं बढ़ाते, तो भी पेनल्टी में कुछ राहत मिल सकती है. 

क्या है एक्सपर्ट की राय?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के डिजिटल दौर में टैक्स विभाग के पास AIS (Annual Information Statement) जैसे आधुनिक टूल्स हैं. इससे आपकी हर छोटी-बड़ी ट्रांजैक्शन की जानकारी विभाग तक तुरंत पहुंच जाती है.  इसलिए, अब कोई भी जानकारी छिपाना नामुमकिन है. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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