ITR Filing Last Date: इंकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की ऑनलाइन फाइलिंग शुरू कर दी है और ऑफलाइन यूटिलिटी भी जारी कर दी है. अब अलग-अलग टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग आखिरी तारीख तय की गई है. समय पर ITR भरने से न सिर्फ लेट फीस और ब्याज से बचेंगे, बल्कि भविष्य में कई वित्तीय परेशानियों से भी दूर रहेंगे.
किसके लिए कब तक ITR भरना जरूरी है?
सबसे पहले यह जान लीजिए कि आपकी आखिरी तारीख कौन-सी है. यह इस बात पर निर्भर करती है कि आप कौन-सा ITR फॉर्म भरते हैं.
| टैक्सपेयर/ITR फॉर्म | आखिरी तारीख |
| ITR-1 और ITR-2 (सैलरी व कैपिटल गेन) | 31 जुलाई 2026 |
| ITR-3 और ITR-4 (बिजनेस, बिना टैक्स ऑडिट) | 31 अगस्त 2026 |
| ITR-3 और ITR-4 (टैक्स ऑडिट वाले मामले) | 31 अक्टूबर 2026 |
| ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट वाले बिजनेस | 30 नवंबर 2026 |
| बिलेटेड रिटर्न | 31 दिसंबर 2026 |
| रिवाइज्ड रिटर्न | 31 मार्च 2027 |
| अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) | 31 मार्च 2031 |
अगर समय निकल गया तो क्या करें?
मान लीजिए किसी वजह से आप तय तारीख तक ITR दाखिल नहीं कर पाए. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. हालांकि इसमें आपको नियमों के अनुसार लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है. अगर बिलेटेड रिटर्न की भी समय सीमा निकल जाए, तब भी एक मौका बचता है. आप अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल कर सकते हैं, जिसकी आखिरी तारीख 31 मार्च 2031 है. यानी संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद 48 महीने (4 साल) तक यह सुविधा उपलब्ध रहेगी.
| बिलेटेड रिटर्न | अपडेटेड रिटर्न |
| मूल समय सीमा छूटने पर दाखिल किया जाता है | मूल और बिलेटेड दोनों समय सीमा छूटने पर दाखिल किया जाता है |
| आखिरी तारीख: 31 दिसंबर 2026 | आखिरी तारीख: 31 मार्च 2031 |
ITR भरने के बाद गलती पकड़ में आए तो क्या होगा?
ऐसा कई लोगों के साथ होता है कि ITR भरने के बाद याद आता है कि कोई टैक्स छूट छूट गई या कोई जानकारी गलत भर दी गई. अच्छी बात यह है कि इसे सुधारा जा सकता है.
- रिवाइज्ड रिटर्न की मदद से पहले से दाखिल ITR में गलती ठीक की जा सकती है. इसकी आखिरी तारीख 31 मार्च 2027 है.
- उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति ने 30 जून 2026 को ITR भरा और 1 अगस्त 2026 को पता चला कि उसने कुछ जरूरी डिडक्शन क्लेम नहीं किए हैं, तो वह रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है.
- अगर रिवाइज्ड रिटर्न की समय सीमा भी निकल जाए, तो अपडेटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है. लेकिन इसमें नई टैक्स छूट या अतिरिक्त लाभ का दावा नहीं किया जा सकता और इसे दोबारा संशोधित भी नहीं किया जा सकता.
लेट ITR भरने से कितना नुकसान हो सकता है?
समय पर ITR न भरने का असर सिर्फ लेट फीस तक सीमित नहीं रहता.
- सेक्शन 234A के तहत बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह या उसके हिस्से के हिसाब से ब्याज देना पड़ सकता है.
- सेक्शन 234F के तहत अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो 5,000 रुपये और 5 लाख रुपये तक है तो 1,000 रुपये की लेट फीस लग सकती है.
- अगर आपने समय पर ITR नहीं भरा तो बिजनेस लॉस या प्रॉपर्टी, शेयर और म्यूचुअल फंड जैसी कैपिटल एसेट्स के नुकसान को भविष्य में कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) करने की सुविधा नहीं मिलेगी.
- इसके अलावा, देर से ITR भरने से आपकी वित्तीय साख पर भी असर पड़ सकता है. बैंक लोन की प्रक्रिया, लोन अप्रूवल और कई मामलों में वीजा प्रोसेसिंग के दौरान भी समय पर ITR दाखिल करना फायदेमंद माना जाता है.
नए टैक्स कानून में क्या बदलेगा?
हालांकि इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहा है, लेकिन AY 2026-27 के लिए अभी भी इनकम टैक्स एक्ट 1961 के नियम लागू रहेंगे क्योंकि यह रिटर्न 31 मार्च 2026 तक की आय से जुड़ा है.
नए कानून में कुछ धाराओं के नंबर बदले गए हैं, जैसे—
- लेट फाइलिंग पर ब्याज: सेक्शन 234A → सेक्शन 423
- लेट फीस: सेक्शन 234F → सेक्शन 428
- बिलेटेड रिटर्न: सेक्शन 139(4) → सेक्शन 263(4)
- अपडेटेड रिटर्न: सेक्शन 139(5) → सेक्शन 263(5)
यानी फिलहाल टैक्सपेयर्स को AY 2026-27 के लिए पुराने कानून के अनुसार ही ITR दाखिल करना होगा.
ये भी पढ़ें: अब पेंशन का गणित समझना हुआ आसान, EPS 2026 के नए नियम एक क्लिक में जानिए
