ईरान-ओमान की बातचीत से तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट 87 डॉलर से नीचे

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज हुई है. ईरान-ओमान की बातचीत और अमेरिकी क्रूड स्टॉक बढ़ने से बाजार पर दबाव बढ़ा.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सेशन में गिरावट आई है. ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग बहाल करने के लिए बातचीत आगे बढ़ने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है. ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 81 डॉलर पर कारोबार करता दिखा.

इस गिरावट के बावजूद कच्चा तेल इस साल अब भी 40% से ज्यादा महंगा है. फारस की खाड़ी से ऊर्जा सप्लाई पर असर डाल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.

तेल की कीमतें क्यों गिरीं?

तेल बाजार में सबसे बड़ी राहत ईरान और ओमान की बातचीत से मिली है. दोनों देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जहाजों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर तैयार करने के ढांचे पर चर्चा कर रहे हैं. ओमान न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने इस "अंतरिम ढांचे" पर बातचीत की है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि दोनों देश 30 से 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समुद्री रास्ते पर बातचीत कर सकते हैं. उनके मुताबिक, एक अस्थायी रास्ते पर सहमति बन गई है, हालांकि स्थायी व्यवस्था को लेकर बातचीत कब शुरू होगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. 

एक हफ्ते में कितना सस्ता हुआ क्रूड?

ब्रेंट क्रूड की कीमत में इस हफ्ते करीब 8% की गिरावट आ चुकी है. वहीं WTI करीब 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है.

संकेतकस्थिति
ब्रेंट क्रूड87 डॉलर से नीचे
WTIकरीब 81 डॉलर
ब्रेंट की साप्ताहिक गिरावटकरीब 8%
इस साल क्रूड की बढ़त40% से ज्यादा

यानी हाल की गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें साल की शुरुआत के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर हैं.

अमेरिका के प्रतिबंधों का असर क्यों सीमित रहा?

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की योजना जरूर पेश की है, लेकिन चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने से फिलहाल परहेज किया है. चीन ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. इसलिए बाजार को तत्काल सप्लाई पर बहुत बड़ा झटका लगने की आशंका कम हुई है.

इसके अलावा अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार बढ़ने की खबर भी कीमतों पर दबाव डाल रही है. अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी 42 लाख बैरल बढ़ी. अगर आधिकारिक आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं, तो यह लगातार चौथा हफ्ता होगा जब भंडार बढ़ा है.

आगे तेल बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

तेल की कीमतों के लिए अब दो चीजें अहम रहेंगी, पहला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग कितनी जल्दी सामान्य होती है और दूसरा अमेरिका-ईरान तनाव किस दिशा में जाता है. 

दूसरी ओर, रूस विदेशों में डीजल शिपमेंट पर लगी पाबंदियों को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है. यूक्रेन के हमलों से रूसी रिफाइनरियों पर असर पड़ने के कारण वैश्विक डीजल सप्लाई पहले ही दबाव में है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद ऊर्जा बाजार की पूरी तस्वीर अभी भी अस्थिर बनी हुई है. 


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लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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