लिस्टिंग गेन पर सरकार भी मांगेगी हिस्सा, समझें IPO टैक्स का पूरा खेल

IPO Capital Gains Tax: क्या आप जानते हैं कि IPO की कमाई पर कितना टैक्स लगता है? जानें शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर लगने वाले नए टैक्स रेट और टैक्स बचाने के बेहतरीन तरीके क्या हैं.

IPO Capital Gains Tax: आजकल शेयर बाजार में IPO (Initial Public Offering) को लेकर काफी चर्चा है. हर कोई लिस्टिंग गेन (Listing Gain) के जरिए रातों-रात मुनाफा कमाना चाहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि IPO से होने वाली इस कमाई पर सरकार को टैक्स भी देना पड़ता है? अगर आप बिना टैक्स प्लानिंग के इन्वेस्ट कर रहे हैं, तो मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में जा सकता है. 

क्या IPO खरीदते ही टैक्स लगता है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सिर्फ IPO के लिए आवेदन करने या शेयर अलॉट होने पर कोई टैक्स नहीं लगता. टैक्स की जिम्मेदारी तब बनती है जब आप उन शेयरों को बेचते हैं. चूंकि टैक्स केवल ‘मुनाफे’ (Capital Gains) पर लगता है, इसलिए जब तक शेयर आपके डीमैट खाते में हैं, आपको एक रुपया भी टैक्स नहीं देना है. टैक्स की गणना आपके बेचने की तारीख और आपके पास शेयर कितने समय तक रहे, इस आधार पर होती है. 

शेयर कब बेचने पर कितना टैक्स लगेगा?

IPO के शेयरों पर टैक्स को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:

  • Short-Term Capital Gains (STCG): अगर आप IPO अलॉट होने के बाद शेयरों को 12 महीने (1 साल) से पहले बेच देते हैं, तो इसे शॉर्ट-टर्म माना जाएगा. 23 जुलाई 2024 के बाद बेचे गए शेयरों पर अब 20% की दर से टैक्स लगता है. 
  • Long-Term Capital Gains (LTCG): अगर आप शेयरों को 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखते हैं, तो यह लॉन्ग-टर्म की श्रेणी में आता है. इस पर 12.5% टैक्स लगता है. राहत की बात यह है कि साल भर में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग-टर्म मुनाफा पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. 

क्या टैक्स बचाने का कोई तरीका है?

हां, स्मार्ट प्लानिंग से आप अपना टैक्स कम कर सकते हैं. सबसे बढ़िया तरीका है कि आप शेयरों को कम से कम एक साल तक होल्ड करें, ताकि आप 12.5% वाले स्लैब में आ जाएं और 1.25 लाख रुपये की छूट का फायदा उठा सकें. इसके अलावा, अगर आपको किसी दूसरे शेयर में घाटा (Capital Loss) हुआ है, तो आप उस घाटे को IPO के मुनाफे के साथ ‘सेट-ऑफ’ कर सकते हैं, जिससे आपकी कुल टैक्स देनदारी कम हो जाएगी. 

ESOPs और टैक्स का क्या कनेक्शन है?

अगर आप किसी कंपनी के कर्मचारी हैं और आपको IPO के दौरान ESOP (Employee Stock Options) मिले हैं, तो नियम थोड़े अलग हैं. जब आप कम कीमत पर शेयर खरीदते हैं, तो मार्केट रेट और आपकी खरीद कीमत के बीच का अंतर आपकी ‘सैलरी’ का हिस्सा माना जाता है और उस पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. बाद में जब आप इन शेयरों को बेचेंगे, तब ऊपर बताए गए शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म नियम लागू होंगे. 

अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनें और अपने ‘Annual Information Statement’ (AIS) से मुनाफे का मिलान जरूर करें. गलत जानकारी देने पर आपको इनकम टैक्स का नोटिस मिल सकता है. इनवेस्टमेंट से पहले कंपनी की मजबूती जरूर जांचें, सिर्फ ट्रेंड के पीछे न भागें. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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