Insubordination Rules in India: ऑफिस में काम करते हुए कई बार ऐसा होता है कि आप अपने मैनेजर के डिसिशन या किसी बात से अग्री नहीं करते है. कभी-कभी यह डिसग्रीमेंट इतनी बढ़ जाती है कि बात HR तक पहुंच जाती है. ऐसे में डर लगा रहता है कि कहीं इस बहस या शिकायत की वजह से आपकी नौकरी न चली जाए या प्रमोशन न रुक जाए. तो आइए जानते हैं कि कानून इस बारे में क्या कहता है.
क्या बहस करने पर नौकरी से निकाले जा सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ मैनेजर से डिसअग्री जताना ‘इन्सबोर्डिनेशन’ (आज्ञा न मानना) नहीं है. नौकरी से तभी निकाला जा सकता है जब आपने किसी लेजिटिमेट ऑर्डर को जानबूझकर मानने से इनकार किया हो. कानूनन, कंपनी को आपको निकालने से पहले एक जांच प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जिसमें आपको अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए.
क्या शिकायत करने पर HR नौकरी छीन सकता है?
अगर आप अपने मैनेजर के काम करने के तरीके को लेकर HR से शिकायत करते हैं, तो यह सीधे तौर पर गलत नहीं है. नियम कहते हैं कि कंपनियों में शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए. लेकिन, अगर आपकी शिकायत के पीछे की मंशा गलत है या आप बदतमीजी कर रहे हैं, तो कंपनी के नियमों के मुताबिक आप पर कार्रवाई हो सकती है.
काम अच्छा किया पर फिर भी प्रमोशन क्यों रुका?
वेतन में बढ़ोतरी (Increment) पूरी तरह से कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करती है. कानून कोई फिक्स्ड रेज की गारंटी नहीं देता. अगर आपने टारगेट पूरे किए हैं, लेकिन आपकी कंपनी के नियमों में असहमति को गलत माना गया है, तो यह इंक्रीमेंट रुकने की वजह बन सकता है. हालांकि, इसे भेदभाव के रूप में चुनौती दी जा सकती है अगर सबूत हों कि जानबूझकर ऐसा किया गया है.
