चार माह के उच्च स्तर पर महंगाई, मार्च में थोक मुद्रास्फीति 14.55 प्रतिशत हुई, जानें क्या हैं इसके कारण

मुद्रास्फीति के बढ़ने से रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में नीतिगत दरों को बढ़ाने का फैसला कर सकता है. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2021 से लेकर लगातार 12वें महीने में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति दो अंक में बनी हुई है.

नयी दिल्ली: महंगाई चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गयी है. थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) मार्च में 14.55 प्रतिशत पर पहुंच गयी. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे तेल और जिंसों की कीमतों में तेजी के चलते हुई, जबकि इस दौरान सब्जियों की मुद्रास्फीति में कमी आयी. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित होने से कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों में वृद्धि हुई है.

लगातार 12वें महीने थोक महंगाई दो अंकों में

मुद्रास्फीति के बढ़ने से रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में नीतिगत दरों को बढ़ाने का फैसला कर सकता है. सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2021 से लेकर लगातार 12वें महीने में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति दो अंक में बनी हुई है. इससे पहले नवंबर, 2021 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 14.87 प्रतिशत थी. फरवरी, 2022 में यह 13.11 प्रतिशत थी, जबकि मार्च, 2021 में यह 7.89 प्रतिशत थी.

महंगाई बढ़ने के हैं कई कारण

समीक्षाधीन माह में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 8.06 प्रतिशत रही, जो फरवरी में 8.19 प्रतिशत थी. इस दौरान सब्जियों की महंगाई दर 26.93 फीसदी से घटकर 19.88 प्रतिशत रही. वहीं दालों, गेहूं, धान, आलू, दूध, अंडा, मांस और मछली की मुद्रास्फीति कम हुई. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘मार्च, 2022 में ऊंची मुद्रास्फीति मुख्य रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, मूल धातुओं आदि की कीमतों में वृद्धि के चलते रही. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के चलते भी महंगाई बढ़ी.’

Also Read: Inflation Rate: मोदी सरकार को चार महीने बाद मिली बड़ी राहत, दिसंबर में थोक महंगाई दर में आयी नरमी
लगातार तीसरे महीने बढ़ी थोक महंगाई

समीक्षाधीन माह में विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति 10.71 प्रतिशत रही, जो फरवरी में 9.84 प्रतिशत थी. ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति 34.52 प्रतिशत थी. कच्चे तेल की मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 83.56 प्रतिशत हो गयी, जो फरवरी में 55.17 प्रतिशत थी. पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति 6.95 प्रतिशत रही. यह लगातार तीसरा महीना है, जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है.

बढ़ती महंगाई चिंता की बात

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सामान्य मानसून के अनुमान के बावजूद खाद्य तेलों जैसे उत्पादों की कीमतों में पर्याप्त कमी नहीं हुई है. इक्रा को उम्मीद है कि चालू माह में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 13.5-15 प्रतिशत के दायरे में रहेगी. हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अप्रैल, 2022 के बाकी दिनों में कच्चे तेल की कीमतें कितनी रहती हैं. नायर ने कहा कि बढ़ती मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति के लिए विशेष रूप से चिंता की बात हो सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Agency

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >