Share Market Today: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला. इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी रही. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के इन्वेस्टर्स को घबराने की जरूरत नहीं है.
आज बाजार में क्या हुआ?
सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही बाजार में बिकवाली देखने को मिली.
| इंडेक्स | स्तर | बदलाव |
| BSE Sensex | 76,899.27 | 670.12 अंक (-0.86%) |
| NSE Nifty 50 | 24,014.75 | 192.15 अंक (-0.79%) |
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, पिछले सप्ताह बाजार में रिकवरी जरूर हुई थी, लेकिन चार हफ्तों की लगातार तेजी के बाद सप्ताह हल्की गिरावट के साथ खत्म हुआ. वहीं सोमवार को Gift Nifty ने भी कमजोर शुरुआत के संकेत दिए थे.
आखिर बाजार गिरा क्यों?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच हालात फिर बिगड़ गए हैं. दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर टूटने के बाद ग्लोबल मार्केट्स में चिंता बढ़ गई है. इससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का डर है, जिसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दिख रहा है.
इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया.
| कमोडिटी | ताजा स्थिति |
| Brent Crude | 79.06 डॉलर प्रति बैरल (4.01% की बढ़त) |
| Crude Oil | 74.27 डॉलर (4.00% की बढ़त) |
| Gold | 4,059.73 डॉलर (1.49% की गिरावट) |
अजय बग्गा ने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव फिलहाल "कौन पहले पीछे हटेगा" जैसी स्थिति बन गया है, लेकिन इससे तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है और इन्वेस्टर्स का रुझान जोखिम वाले इनवेस्टमेंट से दूर हो रहा है.
एशियाई बाजारों का क्या हाल रहा?
भारतीय बाजार अकेला नहीं गिरा. एशिया के कई बड़े शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली.
- जापान का Nikkei 225 1,237.73 अंक यानी 1.81% टूट गया.
- दक्षिण कोरिया का KOSPI भी 7.25% फिसल गया.
वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में कुछ मजबूती रही. S&P 500 0.42% और Nasdaq 0.29% चढ़े, लेकिन सोमवार सुबह Dow Jones Futures 0.39% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा.
क्या आगे भी उतार-चढ़ाव रहेगा?
अजय बग्गा का मानना है कि भारतीय बाजार की लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी पाजिटिव है. इसकी वजह बेहतर कॉरपोरेट कमाई, पिछले दो साल का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन और घरेलू इन्वेस्टर्स की मजबूत भागीदारी है. उनके मुताबिक मौजूदा माहौल में गिरावट आने पर खरीदारी के मौके बन सकते हैं.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में महंगाई करीब 4% के आसपास बनी हुई है. नए फेड चेयर केविन वॉर्श ने संकेत दिए हैं कि साल के आखिर तक ब्याज दरें मौजूदा 3.5% से 3.75% के दायरे से और बढ़ सकती हैं. इसके अलावा IMF ने भी वैश्विक आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 3% कर दिया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते कॉरपोरेट खर्च की वजह से दुनिया भर में कंपनियों के कैश फ्लो पर दबाव बढ़ने की बात भी सामने आई है.
FIIs की वापसी से क्या मिला सहारा?
Ventura के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय बाजार के लिए कुछ अच्छी खबरें भी हैं. जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में विदेशी संस्थागत इन्वेस्टर्स (FIIs) ने कैश मार्केट में 3,421 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध खरीदारी की है. इससे जून के आखिर में बनी बिकवाली की स्थिति पूरी तरह पलट गई है. उनके मुताबिक यह बदलाव इसलिए देखने को मिला क्योंकि इन्वेस्टर्स को पहली तिमाही के बेहतर नतीजों की उम्मीद है, वित्तीय और ऑटो सेक्टर में चुनिंदा खरीदारी हो रही है और वैश्विक संकेतों में भी कुछ स्थिरता आई है. हालांकि भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत और पश्चिम एशिया की स्थिति पर बाजार की नजर बनी रहेगी.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल रही?
गिरावट के बीच कुछ बड़े शेयरों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला.
गिरने वाले शेयर
- इंडिगो
- टाटा स्टील
- मारुति सुज़ुकी
बढ़ने वाले शेयर
- टीसीएस
- ओएनजीसी
- एनटीपीसी
इन्वेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
विनीत बोलिंजकर के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. उनके अनुसार निफ्टी के लिए 23,700-23,800 का स्तर अहम सपोर्ट और 24,200-24,300 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है. ऐसे में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली बड़ी कंपनियों पर ध्यान देना और स्टॉक-विशिष्ट रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा.
यानी फिलहाल बाजार में दबाव जरूर है, लेकिन घरेलू निवेश, FIIs की वापसी और बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद भारतीय शेयर बाजार को आगे सहारा दे सकती है. वहीं अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे.
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