1178 फीट ऊंचा पुल और नीचे चिनाब नदी, 110 किमी की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन

Indian Railway: जम्मू-श्रीनगर रेलवे लाइन का चालू होना जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. कटरा-बनिहाल ट्रैक पर किए गए सफल ट्रायल से यह साफ है कि यह रेलवे मार्ग अब संचालन के लिए तैयार है. आने वाले समय में यह लाइन कश्मीर और बाकी देश के बीच एक अहम कनेक्शन साबित होगी.

Indian Railway: जम्मू-श्रीनगर रेलवे लाइन अब जल्द ही चालू होने के लिए तैयार है और यह खबर खुद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर दी. उन्होंने कहा कि कटरा-बनिहाल ट्रैक पर ट्रायल ट्रेन का सफल परीक्षण किया गया है. खास बात यह है कि यह ट्रेन चिनाब पुल, जो दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में से एक है, पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ी.

कटरा-बनिहाल ट्रैक पर सफल ट्रायल रन

कटरा से बनिहाल तक का यह रेलवे ट्रैक काफी चुनौतीपूर्ण था. यह 180 डिग्री की चढ़ाई वाला ट्रैक है, लेकिन ट्रेन ने इस पर सफलतापूर्वक ट्रायल रन पूरा किया. बुधवार को सुबह 10:30 बजे कटरा स्टेशन से ट्रेन रवाना हुई और महज डेढ़ घंटे में बनिहाल स्टेशन पहुंच गई. यह ट्रैक पर आखिरी ट्रायल था, जो पूरी तरह से सफल रहा. अब रेलवे अधिकारियों द्वारा इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और जम्मू-श्रीनगर के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा.

चिनाब पुल पर दौड़ी ट्रायल ट्रेन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सफल ट्रायल को लेकर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “चिनाब पुल पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल ट्रेन का सफल परीक्षण किया गया, यह वाकई में एक ऐतिहासिक दिन.” यह ट्रायल चिनाब पुल और अंजी खड्ड ब्रिज पर किया गया, जो इस रेलवे रूट की दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं. चिनाब पुल की ऊंचाई 359 मीटर (1178 फीट) है, जो एफिल टावर से भी ऊंचा है.

आखिरी ट्रायल रन और आगे की प्रक्रिया

बीते महीने इस ट्रैक पर 6 अलग-अलग ट्रायल रन किए गए थे. हालांकि, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) दिनेश चंद देशवाल ने यह नहीं बताया कि कब तक रेल सेवाएं शुरू हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अब तक के सभी ट्रायल संतोषजनक रहे हैं. जल्द ही इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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