भारतीय स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक उछाल: 1.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा प्रीमियम का आंकड़ा

Health Insurance: वित्त मंत्रालय ने इस वृद्धि का श्रेय बढ़ती जागरूकता, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा की बढ़ती मांग को दिया है.

Health Insurance: भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र (Health Insurance Sector) एक नए मील के पत्थर पर पहुंच गया है. वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की कुल राशि 1.2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है. लगभग 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ, यह क्षेत्र अब देश की वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है.

वित्त मंत्रालय ने इस वृद्धि का श्रेय बढ़ती जागरूकता, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा की बढ़ती मांग को दिया है.

कैशलेस दावों के लिए ‘सुपरफास्ट’ समयसीमा

पॉलिसीधारकों को अस्पताल के बिलों और डिस्चार्ज की लंबी प्रक्रिया से बचाने के लिए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब कंपनियों को ‘कैशलेस’ दावों का निपटान निर्धारित समय में करना होगा.

  • 1 घंटा: अस्पताल द्वारा अनुरोध भेजे जाने के एक घंटे के भीतर ‘प्री-ऑथराइजेशन’ (पूर्व-मंजूरी) देना अनिवार्य है.
  • 3 घंटे: अस्पताल से छुट्टी (Discharge) के समय अंतिम मंजूरी तीन घंटे के भीतर मिलनी चाहिए.

इन नियमों का उद्देश्य मरीजों को अनावश्यक देरी से बचाना और उन्हें तनावमुक्त चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित कराना है.

प्रीमियम बढ़ने के पीछे के कारण

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में हाल के दिनों में बढ़ोतरी देखी गई है.

  1. बढ़ती उम्र: पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र के साथ जोखिम बढ़ता है.
  2. हायर कवरेज: लोग अब गंभीर बीमारियों के लिए बड़े बीमा कवर (High Sum Insured) ले रहे हैं.
  3. आधुनिक तकनीक: अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के इस्तेमाल से इलाज महंगा हुआ है.

इरडा ने साफ किया है कि प्रीमियम की दरें ‘उचित और व्यवहारिक’ होनी चाहिए. कंपनियों को ग्राहकों के फीडबैक और विश्वसनीय डेटा के आधार पर समय-समय पर अपनी कीमतों की समीक्षा करनी होगी.

शिकायत निवारण: 93% मामलों का निपटान

बीमा कंपनियों के प्रति ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाने के लिए ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल एक प्रभावी हथियार साबित हुआ है।

  • वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं.
  • इनमें से 1,27,755 (93%) शिकायतों का समाधान उसी साल के भीतर कर दिया गया.

क्यों खारिज होते हैं क्लेम?

  • सब-लिमिट (Sub-limits): कमरे के किराए या विशेष सर्जरी पर खर्च की सीमा.
  • को-पेमेंट (Co-payment): बिल का वह हिस्सा जो ग्राहक को अपनी जेब से देना होता है.
  • गैर-चिकित्सा व्यय: दस्ताने, मास्क और अन्य डिस्पोजेबल आइटम जो कवर नहीं होते.
  • बीमा राशि से अधिक खर्च: जब बिल आपकी पॉलिसी की कुल लिमिट (Sum Insured) को पार कर जाए.

Also Read : मिडिल ईस्ट के तनाव से क्या भारत में खाद (Fertilizer) महंगी होगी? जानिए किसान और कंपनियों पर इसका असर

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >