India-US Trade Talk: कृषि मुद्दों पर भारत का रुख सख्त, निर्णायक दौर में समझौता

India-US Trade Talk: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत निर्णायक दौर में है. भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया है. अगर 9 जुलाई 2025 तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 26% अतिरिक्त शुल्क फिर से लागू कर सकता है. भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों में शुल्क छूट चाहता है, जबकि अमेरिका कृषि, डेयरी और औद्योगिक उत्पादों पर रियायत मांग रहा है. यह वार्ता 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में अहम कदम है.

India-US Trade Talk: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच गई है. भारत ने इस वार्ता में कृषि और डेयरी क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट रूप से सख्त कर लिया है. भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल कर रहे हैं, जो इस समय वाशिंगटन में हैं. वार्ता 26 जून से शुरू हुई थी और इसे अंतिम रूप देने के लिए भारतीय दल ने अपनी यात्रा तीन दिन बढ़ा दी है.

9 जुलाई तक समझौता नहीं हुआ तो लागू होगा 26% शुल्क

दोनों पक्षों की कोशिश है कि 9 जुलाई 2025 से पहले समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए. अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर 26% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया था. अगर वार्ता सफल नहीं होती है, तो यह शुल्क फिर से लागू हो सकता है. अमेरिका का 10% मूल शुल्क अभी भी लागू है और भारत चाहता है कि उसे 26% शुल्क से पूरी छूट मिले.

भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर खोलने से इनकार

अमेरिका कृषि, डेयरी, इलेक्ट्रिक वाहन, शराब, पेट्रोरसायन, और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों जैसे क्षेत्रों पर शुल्क छूट चाहता है. लेकिन, भारत के लिए कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में बाजार खोलना मुश्किल है. यह क्षेत्र न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, बल्कि इनमें छोटे किसान और ग्रामीण आजीविका सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. अब तक भारत ने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है.

भारत की मांग श्रम-प्रधान क्षेत्रों को छूट

भारत कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में शुल्क रियायत की मांग कर रहा है. वाणिज्य मंत्रालय ने भारतीय निर्यातकों और उद्योगों को सूचित किया है कि यह समझौता कई चरणों में होगा और फिलहाल पहला चरण तय करने की कोशिश जारी है.।

2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और अमेरिका इस समझौते के जरिए द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं, जो फिलहाल 191 अरब डॉलर है. इसलिए यह वार्ता भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

वार्ता ऑनलाइन और फिजिकल मोड में जारी रहेगी

5 से 11 जून के बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. आने वाले दिनों में वार्ता का सिलसिला ऑनलाइन और फिजिकल मोड दोनों तरीकों से जारी रहेगा. इस बीच, भारत की ओर से स्पष्ट संकेत मिल चुके हैं कि कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में लचीलापन दिखाना संभव नहीं होगा.

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चालू वर्ष में अमेरिका को निर्यात में तेजी

वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-मई अवधि में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 21.78% बढ़कर 17.25 अरब डॉलर हो गया है, जबकि अमेरिका से आयात 25.8% बढ़कर 8.87 अरब डॉलर रहा है. यह आंकड़े बताते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंध पहले से मज़बूत हो रहे हैं और आगामी समझौता इसमें और तेजी ला सकता है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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