Indian Pharma Sector Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का सीधा असर अब भारत के फार्मा सेक्टर पर पड़ता दिख रहा है. इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव सुदर्शन जैन ने हाल ही में बताया कि इस संकट की वजह से दवा बनाने की लागत बढ़ गई है. माल ढुलाई (Freight), बीमा (Insurance) और सॉल्वेंट्स (दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल) की कीमतों में भारी उछाल आया है.
सप्लाई चेन पर क्या असर पड़ा है?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और तनाव के कारण समुद्री रास्तों से माल भेजना महंगा और जोखिम भरा हो गया है. सुदर्शन जैन के अनुसार, माल ढुलाई का खर्च और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ चुका है. इसके अलावा, दवाओं के निर्माण के लिए जरूरी ‘सॉल्वेंट्स’ की कीमतें भी बढ़ गई हैं. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि सरकार और उद्योग जगत का मुख्य लक्ष्य इस समय कीमतों से ज्यादा दवाओं की उपलब्धता (Availability) बनाए रखना है.
क्या दवाओं की कमी होगी?
भारत दुनिया के 200 से अधिक देशों को दवाइयां सप्लाई करता है और करोड़ों मरीज भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं. जैन ने भरोसा दिलाया कि फार्मा विभाग और वाणिज्य मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए. कोशिश यही है कि संकट के बावजूद दुनिया भर के मरीजों को समय पर दवाएं मिलती रहे.
भारतीय फार्मा सेक्टर की ताकत क्या है?
भारत का दवा उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है. वर्तमान में भारतीय फार्मा सेक्टर 30 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है और 30 बिलियन डॉलर का इसका घरेलू बाजार है. खास बात यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा अमेरिका (USFDA) द्वारा प्रमाणित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में ही हैं.
2047 के लिए क्या है खास प्लान?
भविष्य की ओर देखते हुए, भारतीय फार्मा उद्योग ने साल 2047 तक 450 बिलियन डॉलर का योगदान देने का महत्वाकांक्षी (ambitious) लक्ष्य रखा है. सुदर्शन जैन ने कहा कि आने वाले समय में ‘किफायती इनोवेशन’ (Affordable Innovation) पर जोर दिया जाएगा. उद्योग जगत का विजन 2047 तक 100 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स विकसित करना और भारत को फार्मा के क्षेत्र में दुनिया का बेंचमार्क बनाना है.
ये भी पढ़ें: ग्लोबल मार्केट में चमका सोना, भारतीय बाजार में चांदी के दाम गिरे, जानें क्या है आज का अपडेट
