Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया (West Asia) के तनाव ने ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की आग लगा दी है. ऐसे में कुछ कंपनियां भारत के सस्ते तेल को विदेशों में महंगे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रही थीं. इसे रोकने के लिए सरकार ने ‘एक्सपोर्ट ड्यूटी’ बढ़ा दी है और आम जनता के लिए ‘एक्साइज ड्यूटी’ घटा दी है.
एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी
सरकार ने साफ कर दिया है कि देश का तेल पहले देश की जनता के काम आएगा. इसलिए बाहर भेजे जाने वाले ईंधन पर टैक्स बढ़ा दिया गया है:
- डीजल निर्यात: अब प्रति लीटर ₹21.5 का टैक्स लगेगा.
- हवाई ईंधन (ATF): अब प्रति लीटर ₹29.5 का टैक्स लगेगा.
- मकसद: तेल कंपनियां सिर्फ मुनाफे के चक्कर में सारा स्टॉक विदेश न भेज दें और देश में किल्लत न हो.
आम आदमी को बड़ी राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जनता की जेब को राहत देने के लिए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी कम कर दी है.
- पेट्रोल: टैक्स ₹13 से घटाकर सिर्फ ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया.
- डीजल: टैक्स ₹10 से घटाकर शून्य (NIL) कर दिया गया है.
- इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर सीधे आपकी जेब पर नहीं पड़ेगा.
भारत के पास कितना है ‘बैकअप’?
दुनिया डरी हुई है, लेकिन भारत निश्चिंत है क्योंकि हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है.
- 60 दिनों का पक्का स्टॉक: अगले 2 महीनों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट पहले ही फाइनल हो चुका है.
- 74 दिन की क्षमता: भारत की कुल स्टोरेज क्षमता 74 दिनों की है, जिसमें जमीन के नीचे बने सुरक्षित भंडार (Strategic Reserves) भी शामिल हैं.
- 27 दिन बाद भी मजबूती: युद्ध शुरू हुए 27 दिन बीत चुके हैं, फिर भी देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर तेल की कोई कमी नहीं है.
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