LPG Consumption: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की रसोई तक दस्तक दे दी है. आपूर्ति में आई दिक्कतों की वजह से मार्च 2026 में भारत की तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की खपत में 12.8% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- मार्च में एलपीजी की खपत घटकर 23.79 लाख टन रह गई, जो पिछले साल मार्च में 27.29 लाख टन थी.
- रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति में 8.1% की कमी आई.
- होटल और इंडस्ट्री को दी जाने वाली गैस में 48% की भारी कटौती हुई.
- इसमें सबसे बड़ी यानी 75.5% की गिरावट देखी गई.
क्यों आई यह कमी ?
भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी इम्पोर्टकरता है. इस इम्पोर्टका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर आता है. ईरान और इजराइल के बीच जवाबी कार्रवाई के बाद इस जलमार्ग के बंद होने से सऊदी अरब और यूएई (UAE) से आने वाली सप्लाई बाधित हो गई.
सरकार का ‘रेस्क्यू’ प्लान
घरों में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने रणनीतिक कदम उठाए:
- कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सप्लाई काटकर उसे घरेलू सिलेंडरों की तरफ मोड़ा गया.
- रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे पेट्रोरसायन (Petrochemical) उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं.
- घरेलू एलपीजी उत्पादन मार्च में 11 लाख टन से बढ़कर 14 लाख टन पहुंच गया.
| ईंधन (Fuel) | मार्च में स्थिति | पूरे वित्त वर्ष (2025-26) में बढ़त |
| पेट्रोल | 7.6% बढ़कर 37.8 लाख टन | 6.5% की कुल बढ़त |
| डीजल | 8.1% बढ़कर 87.27 लाख टन | 3.6% की कुल बढ़त |
| एटीएफ (हवाई ईंधन) | स्थिर (लगभग 8.07 लाख टन) | 2% की कुल बढ़त |
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