कच्चे तेल का खतरा टला, लेकिन अब मानसून बढ़ाएगा आपकी जेब का खर्च; जानें क्यों महंगी हो सकती है रसोई

Inflation Outlook : यूएस-ईरान शांति समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तो शांत हो गई हैं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस साल देश में कम बारिश या कमजोर मानसून आम आदमी के मंथली बजट को ₹1,000 से ₹3,000 तक बढ़ा सकता है. जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें.

Inflation Outlook : कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे देश में महंगाई बढ़ेगी. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल सप्लाई का संकट टल गया है.

इसके बावजूद भारत के लिए महंगाई की चुनौती कम नहीं हुई है. मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा के अनुसार भारत के लिए आज कच्चे तेल से भी बड़ा जोखिम कमजोर मानसून है. इसका कारण बेहद सीधा है. भारतीय महंगाई बास्केट (CPI) में ईंधन (Fuel) के मुकाबले भोजन (Food Items) का वजन (Weightage) कहीं ज्यादा है.”

दरअसल, भारत की खुदरा महंगाई दर को मापने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाद्य पदार्थों (Food) का हिस्सा 46% है. चूंकि भारत की लगभग आधी खेती आज भी पूरी तरह से बारिश (Rain-fed) पर निर्भर है, इसलिए यदि मानसून कमजोर रहता है, तो अनाज, दालों, तिलहन और हरी सब्जियों के उत्पादन में भारी गिरावट आती है, जिससे कीमतें आसमान छूने लगती हैं.

AlsoRead : भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते की तारीख तय, 15 जुलाई से सस्ती होंगी ये चीजें, व्हिस्की पर 150% टैक्स घटकर हुआ 40%

आपकी रसोई का बजट कितना बिगड़ेगा?

कमजोर मानसून या अल नीनो (El Niño) जैसी मौसमी स्थितियों का सीधा असर आम आदमी की थाली पर पड़ता है.

  • सब्जी, दाल और दूध में उछाल: बारिश की कमी से सब्जियों, दालों, खाद्य तेल (Edible Oils) और दूध की महंगाई दर दहाई अंक (Double Digit) को पार कर सकती है. एक मध्यम आय वाले शहरी परिवार का मासिक घरेलू खर्च ₹1,000 से ₹3,000 तक बढ़ सकता है. कम आय वाले और ग्रामीण परिवार इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. ग्रामीणों को एक तरफ तो महंगे राशन की मार झेलनी पड़ती है, और दूसरी तरफ फसल खराब होने से उनकी खेती की कमाई (Farm Income) भी घट जाती है.

महंगाई के मोर्चे पर क्यों है चिंता?

आंकड़े बताते हैं कि देश में महंगाई का दबाव पहले ही दिखने लगा है. अप्रैल के 3.48% के मुकाबले मई में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई. इसी दौरान थोक महंगाई दर (WPI) भी बढ़कर 9.68% दर्ज की गई. इन्ही अनिश्चितताओं को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है.

यदि मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी. ऐसी स्थिति में आरबीआई के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा, जिससे आपकी लोन की ईएमआई (EMI) महंगी बनी रह सकती है.

क्या देश में सूखा जैसे हालात बनेंगे?

राहत की बात यह है कि अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश में अतीत की तरह भुखमरी या सूखे जैसे बदतर हालात नहीं बनेंगे. पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक बुनियादी संरचना काफी मजबूत हुई है.

हमारे पास वर्तमान में बड़े पैमाने पर खाद्यान्न (Foodgrain) का बफर स्टॉक उपलब्ध है.
सिंचाई (Irrigation) का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक हुआ है.
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन नेटवर्क में सुधार हुआ है, जिससे सरकार कमी वाले इलाकों में तुरंत अनाज पहुंचा सकती है.

साफ है कि भले ही भारत में कोई बड़ा खाद्य संकट न आए, लेकिन कमजोर मानसून आम जनता की जेब और देश की आर्थिक विकास दर (Economic Growth) दोनों की रफ्तार को धीमा जरूर कर सकता है.

Also Read : SBI ने एक साल में स्टेशनरी पर खर्च किए ₹986 करोड़! देखें, किस बैंक ने कितना खर्च किया

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >