Aadhaar App Pre Installation: भारत सरकार ने स्मार्टफोन बनाने वाली दिग्गज कंपनियों (Apple, Samsung, Google आदि) को अपने फोन में देश के बायोमेट्रिक पहचान ऐप ‘आधार’ (Aadhaar) को पहले से इंस्टॉल (Pre-install) करने के प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि आईटी मंत्रालय (IT Ministry) इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है.
क्या था विवाद
जनवरी 2026 में UIDAI ने सरकार से सिफारिश की थी कि नए स्मार्टफोन्स में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया जाए. आधार एक 12-अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर है, जो भारत के लगभग 1.34 बिलियन निवासियों के पास है. इसका इस्तेमाल बैंकिंग, टेलीकॉम और एयरपोर्ट एंट्री जैसे कामों में वेरिफिकेशन के लिए बड़े स्तर पर किया जाता है.
स्मार्टफोन कंपनियों ने क्यों किया विरोध?
एप्पल और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर कई गंभीर चिंताएं जताई थीं.
- सुरक्षा और प्राइवेसी: कंपनियों का मानना था कि सरकारी ऐप को सिस्टम लेवल पर प्री-इंस्टॉल करने से डिवाइस की सुरक्षा (Device Security) और यूजर की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है.
- लागत में बढ़ोतरी: कंपनियों को भारत के लिए अलग और निर्यात मार्केट के लिए अलग मैन्युफैक्चरिंग लाइन चलानी पड़ती, जिससे उत्पादन की लागत बढ़ जाती.
- सॉफ्टवेयर कम्पैटिबिलिटी: अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ऐप के तालमेल को लेकर भी तकनीकी चिंताएं थीं.
प्राइवेसी एक्सपर्ट्स की जीत
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे डिजिटल एडवोकेसी ग्रुप्स ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकों का फोन उनकी स्वायत्तता (Autonomy) का हिस्सा है, न कि सरकारी आदेशों को थोपने का कोई जरिया. आधार डेटा लीक से जुड़ी पिछली शिकायतों के बाद, ऐप की सुरक्षा को लेकर वैसे भी काफी बहस होती रही है.
सरकार का नया रुख
आईटी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि सरकार अब किसी भी ऐप की प्री-लोडिंग (Preloading) के पक्ष में नहीं है, जब तक कि वह बहुत अनिवार्य न हो. इससे पहले दिसंबर में भी एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप को अनिवार्य करने का आदेश सरकार को वापस लेना पड़ा था.
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