Coal Demand: पश्चिम एशिया संकट के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा (Energy) का गणित बिगड़ गया है. टाटा स्टील और सेल के संयुक्त उद्यम एमजंक्शन (mjunction) के अनुसार, भारतीय कोयला बाजार में मांग और कीमतों में तेजी देखी जा रही है. अच्छी बात यह है कि बिजली क्षेत्र फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन अन्य उद्योगों पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
कोयले की नीलामी में चढ़ीं बोलियां
कोयला नीलामी के शुरुआती संकेत बताते हैं कि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच सख्ती बढ़ गई है. फरवरी के आंकड़ों के मुताबिक, कोयले की बोलियां तय कीमतों से लगभग 35 प्रतिशत अधिक रहीं. इसका मतलब यह है कि कंपनियां अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए तय रेट से कहीं ज्यादा पैसा देने को तैयार हैं. यह इस बात का साफ संकेत है कि बाजार में कोयले की तत्काल कमी महसूस की जा रही है.
गैस की जगह कोयले पर निर्भरता
युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस (Natural Gas) और एलपीजी की सप्लाई में बाधा आ रही है. ऐसे में जो उद्योग अब तक गैस पर निर्भर थे, उन्होंने अपनी भट्टियां चलाने के लिए कोयले का रुख करना शुरू कर दिया है. साथ ही, विदेशों से आयात होने वाले कोयले में भी दिक्कतें आ रही हैं, जिसकी वजह से ‘देसी कोयले’ की डिमांड अचानक बढ़ गई है.
बिजली क्षेत्र सुरक्षित, पर उद्योगों पर दबाव
एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक विनय वर्मा के अनुसार, भारत का बिजली क्षेत्र (Power Sector) काफी हद तक सुरक्षित है क्योंकि बीते वर्षों में गैस पर निर्भरता कम की गई है. अब हमारी मुख्य ताकत कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा (Solar/Wind) हैं. हालांकि, खाद और रसायन जैसे बड़े उद्योगों में गैस की जगह पूरी तरह कोयले का इस्तेमाल शुरू होने में अभी वक्त लगेगा, जिससे उन क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा का संकट बना हुआ है.
गर्मियों की तैयारी और विदेशी तनाव
गर्मियों का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में बिजली घर (Power Plants) पहले से ही अपना स्टॉक जमा करने में जुटे हैं. कच्चा तेल और एलपीजी के लिए विदेशों पर निर्भरता के कारण भारत पर बाहरी झटकों का असर पड़ रहा है. औद्योगिक इलाकों में सीएनजी और रसोई गैस की कमी के कारण अब कोयला ही ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
Also Read: नींबू पानी पर वसूला 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’; सरकार ने 1915 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की दी सलाह
