Income Tax Form 97 and 98: भारत सरकार और इनकम टैक्स विभाग ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए नियमों में भारी बदलाव किया है. 1 अप्रैल से लागू हुए ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ के तहत अब पुराने और पेचीदा फॉर्म्स को हटाकर उनकी जगह नए और सरल फॉर्म्स लाए गए हैं. इस सुधार का सबसे बड़ा हिस्सा है फॉर्म 60 और 61 का बंद होना, जिनकी जगह अब फॉर्म 97 और 98 ने ले ली है. विभाग का मकसद पेपरवर्क को कम करना और टैक्स भरने की प्रक्रिया को ट्रांसपेरेंट बनाना है.
क्या है फॉर्म 97 और किसे है इसकी जरूरत?
NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है और आप कोई बड़ा वित्तीय लेनदेन (High-value transaction) कर रहे हैं, तो आपको फॉर्म 97 भरना होगा. पहले यही काम फॉर्म 60 के जरिए होता था. सरकार ने अब कई ट्रांजेक्शन्स के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है, जिससे फॉर्म भरने का बोझ कम हो जाएगा. विभाग का अनुमान है कि इस बदलाव से सालाना फॉर्म भरने वालों की संख्या 12.5 करोड़ से घटकर 2 करोड़ से भी कम रह जाएगी.
पैन कार्ड कब जरूरी है और फॉर्म 97 कब भरें?
अब कई कामों के लिए सिर्फ पैन कार्ड ही चलेगा, वहां फॉर्म 97 काम नहीं आएगा. जैसे:
- 5 लाख रुपये से ज्यादा की गाड़ी खरीदना.
- क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करना या डीमैट अकाउंट खुलवाना.
- 50,000 रुपये से ज्यादा के म्यूचुअल फंड या RBI बॉन्ड्स खरीदना.
फॉर्म 97 का इस्तेमाल इन स्थितियों में होगा:
- होटल या रेस्टोरेंट में किसी इवेंट के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर.
- नया बैंक खाता खुलवाते समय.
- 20 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने पर.
- 1 लाख रुपये से ज्यादा के अनलिस्टेड शेयर्स का लेन-देन करने पर.
फॉर्म 98 क्या है और यह किसके लिए है?
फॉर्म 98 मुख्य रूप से उन लोगों या संस्थाओं के लिए है जो फॉर्म 97 स्वीकार करते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आप किसी बैंक में बिना पैन के खाता खोलते हैं और फॉर्म 97 जमा करते हैं, तो उस जानकारी को आगे रिपोर्ट करने के लिए बैंक फॉर्म 98 का उपयोग करेगा. यह सुनिश्चित करता है कि बिना पैन वाले बड़े लेन-देन का रिकॉर्ड भी सरकार के पास सुरक्षित रहे.
इस से जुड़ी इंकम टैक्स इंडिया की ऑफिशियल एक्स पोस्ट देखें:
इन बदलावों से आपको क्या फायदा होगा?
नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब आपको बेवजह के कागजी झंझटों में नहीं फंसना पड़ेगा. ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ के तहत इन फॉर्म्स को इतना सरल बनाया गया है कि एक आम आदमी भी इन्हें आसानी से समझ सके. सरकार का सीधा संदेश है: जहां संभव हो पैन का इस्तेमाल करें, और जहां पैन न हो वहां नए सरल फॉर्म्स का सहारा लें. इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी.
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