Credit Card: डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड अब महज एक प्लास्टिक का कार्ड नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और जरूरत बन गया है. रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के लालच में आज हर नौकरीपेशा व्यक्ति की जेब में कार्ड्स की संख्या बढ़ती जा रही है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह मल्टीपल कार्ड कल्चर आपकी वित्तीय सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह? विशेषज्ञों ने अब इसकी आदर्श संख्या को लेकर तस्वीर साफ कर दी है.
कितने कार्ड हैं आपकी जेब के लिए फिट?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रेडिट कार्ड की कोई एक तय संख्या सबके लिए सही नहीं हो सकती, क्योंकि यह हर व्यक्ति के खर्च करने के अनुशासन पर निर्भर करता है. हालांकि, एक औसत प्रोफेशनल के लिए 2 से 3 कार्ड रखना सबसे बेहतर माना जाता है. इससे ज्यादा कार्ड होने पर न केवल उन्हें मैनेज करना मुश्किल होता है, बल्कि अनचाहे खर्चों का बोझ भी बढ़ जाता है.
एक से ज्यादा कार्ड रखने के स्मार्ट फायदे
अगर आप अनुशासन के साथ कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो एक से अधिक कार्ड आपके लिए मुनाफे का सौदा हो सकते हैं:
- एक कार्ड ग्रॉसरी पर बचत कराता है, तो दूसरा पेट्रोल या ट्रैवल पर. अलग-अलग कार्ड्स से आप हर ट्रांजैक्शन पर अधिकतम रिवॉर्ड बटोर सकते हैं.
- कई कार्ड होने से आपकी कुल क्रेडिट लिमिट बढ़ जाती है. अगर आप लिमिट का केवल 30% हिस्सा ही खर्च करते हैं, तो आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर तेजी से सुधरता है.
- किसी यात्रा के दौरान या तकनीकी दिक्कत आने पर एक कार्ड फेल हो जाए, तो दूसरा कार्ड आपकी लाज बचा सकता है.
ज्यादा कार्ड बन सकते हैं सिरदर्द जानिए कैसे
जहां फायदे हैं, वहीं खतरों की घंटी भी बज रही है. विशेषज्ञों ने इन 3 बड़े जोखिमों के प्रति आगाह किया है:
- हर कार्ड की बिलिंग तारीख अलग होती है. अगर आप एक भी तारीख भूल गए, तो भारी पेनाल्टी और ब्याज आपके बजट को बिगाड़ सकता है.
- कई प्रीमियम कार्ड्स की सालाना फीस बहुत ज्यादा होती है. यदि आप उस कार्ड के फायदों का इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो वह आपकी जेब पर डाका डालने जैसा है.
- ज्यादा क्रेडिट लिमिट अक्सर इंसान को फिजूलखर्ची के लिए उकसाती है, जिससे धीरे-धीरे आप कर्ज के ऐसे जाल में फंस सकते हैं जहाँ से निकलना मुश्किल हो जाता है.
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