'कोरोना वायरस के खतरे से निपटने की खातिर रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में करनी चाहिए कटौती'

कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए अमेरिका के केेंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों में करीब 0.5 फीसदी की कटौती की है. इधर, भारत में भी इस महामारी के खतरों से मुकाबला करने के लिए रिजर्व बैंक से रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश रखने की बात की जा रही है. बुधवार को आईडीएफसी म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि रिजर्व बैंक को कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए.

नयी दिल्ली : आईडीएफसी म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक को अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के असर से निपटने के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश देखनी होगी. ‘कोरोना वायरस और प्राथमिकता’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैक की बतायी गयी प्राथमिकता ऋण में वृद्धि वापस लाना है.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘मौद्रिक नीति समिति (कुल मिलाकर जरूरी नहीं कि सभी सदस्यों की) की जो प्राथमिकता दिख रही है, वह यह कि जैसे ही मुद्रास्फीति अनुमति’ दे (मुद्रास्फीति का दबाव कम हो), नीतिगत रुख को नरम किया जाए. केंद्रीय बैंक की यह प्राथमिकता कोरोना वायरस के प्रभाव जमाने से पहले से है. ऐसे में जो नयी सूचनाएं सामने आ रही हैं, उसके आधार पर यह कदम देर-सवेर उठाया ही जाना है.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री की प्राथमिकता भी रिजर्व बैंक से मिलती-जुलती है. मसलन, ऋण की वृद्धि को पटरी पर लाना. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो दिक्कतें सामने आ रही हैं, उनके आधार पर कहा जा सकता है कि इस मोर्चे पर गुंजाइश सीमित है. यही नहीं, यदि कर की वृद्धि कमजोर रहती है और वित्तीय बाजारों की कमजोरी से पूंजीगत प्राप्तियों के लक्ष्य पर दबाव पड़ता है, तो यह गुंजाइश और सिमट जायेगी. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात की संभावना कम है कि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने के लिए खर्चों के मोर्चे पर कुछ समझौता करेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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