विमान में बम की फर्जी कॉल और 3 करोड़ स्वाहा, कहीं यह वित्तीय आतंकवाद तो नहीं?

Financial Terrorism: विमान में फर्जी कॉल रविवार से एयरलाइनों को निशाना बनाकर की गई. इसमें गुरुवार 17 अक्टूबर 2024 की देर रात तक लगभग 40 झूठी धमकियां गईं. ये धमकियां एयरलाइनों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही हैं.

Financial Terrorism: देश में असमाजिक तत्वों की ओर से विमान में फर्जी कॉल का सिलसिला बढ़ गया है. अभी हाल के दिनों में विमान में बम की फर्जी कॉल से आम सवारियों की ही नहीं, सरकार और विमानन कंपनियों की भी सांसें अटक जाती हैं. अभी हाल के दिनों में शुक्रवार 18 अक्टूबर 2024 को सोशल मीडिया के जरिए देसी विमानन कंपनी विस्तारा की 3 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बम होने की धमकी मिली थी, जो बाद में झूठी मिली. आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि विमानों में बम की 1 फर्जी कॉल से किसी भी विमानन कंपनी का कम से कम 3 करोड़ रुपये स्वाहा हो जाते हैं. इन शरारती तत्वों ने पिछले कुछ दिनों में करीब 40 विमानों में बम होने की धमकी दी है, जिससे करीब 60 से 80 करोड़ रुपये के नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है. बम की झूठी धमकी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि कहीं यह वित्तीय आतंकवाद का हिस्सा तो नहीं है?

इमरजेंसी लैंडिंग विमानन के लिए महंगा सौदा

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 14 अक्टूबर को 130 टन जेट ईंधन से लदे एयर इंडिया बोइंग 777 विमान ने मुंबई से न्यूयॉर्क के जेएफके हवाई अड्डे के लिए 16 घंटे की नॉनस्टॉप उड़ान भरी. हालांकि, उड़ान भरने के तुरंत बाद एयरलाइन को बम की धमकी मिली. इस कारण एयर इंडिया के इस विमान को न्यूयॉर्क के जेएफके हवाई अड्डे पर ले जाने के बजाय दो घंटे के भीतर दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी. यह घटना न केवल सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि एयरलाइन के लिए एक महंगा सौदा भी है.

100 टन ईंधन बर्बाद

एयर इंडिया के पायलट के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर दी है कि यात्रियों, सामान और कार्गो के साथ विमान का करीब 340-350 टन के बीच था. बोइंग 777 विमान की लैंडिंग का अधिकतम वजन 250 टन है. सुरक्षित रूप से उतरने के लिए चालक दल को लगभग 100 टन ईंधन फेंकना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे न केवल ईंधन की बर्बादी हुई, बल्कि ईंधन की लागत के तौर 1 करोड़ रुपये का भी नुकसान हुआ.

एक झूठी धमकी से बढ़ जाता है उड़ान का खर्च

रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरजेंसी लैंडिंग के विमान में सवार 200 से अधिक यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को होटल में ठहरने की व्यवस्था, छूटे हुए कनेक्शन के लिए मुआवजा, गहन जांच के लिए विमान को रोकना और नए चालक दल की व्यवस्था करने में विमानन कंपनी को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है, जिससे उड़ान की लागत बढ़ जाती है. इस बीच, एयरलाइन को अपनी वापसी उड़ान अनुसूची में व्यवधान से वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ता है. वरिष्ठ अधिकारियों का अनुमान है कि इस एक झूठी धमकी से एक विमानन कंपनी को 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो जाता है.

विमानन कंपनियों पर 60-80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

रिपोर्ट में कहा गया है विमान में फर्जी कॉल रविवार से एयरलाइनों को निशाना बनाकर की गई. इसमें गुरुवार 17 अक्टूबर 2024 की देर रात तक लगभग 40 झूठी धमकियां गईं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये धमकियां एयरलाइनों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही हैं और मोटे अनुमान के आधार पर विमान में बम की फर्जी कॉल से विमानन कंपनियों को करीब 60-80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा.

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विमान में बम की फर्जी कॉल वित्तीय आतंकवाद

एविएशन इंडस्ट्रीज के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान में बम होने की फर्जी कॉल से विमानन कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसके साथ वरिष्ठ एयरलाइन अधिकारियों ने विमान में फर्जी कॉल को वित्तीय आतंकवाद बताया और उन्होंने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह त्योहारों का सीजन है और हम अपने यात्रियों में डर का माहौल पैदा नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा कि एयरलाइंस किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले रही हैं, भले ही उन्हें विश्वसनीय माना जाए या नहीं.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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