Savings Account Alert :अक्सर हम अपने बैंक खाते की पासबुक या मोबाइल मैसेज देखते हैं तो 20, 50 या 100 रुपये कटे हुए मिलते हैं. कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि जब कोई बड़ा लेन-देन हुआ ही नहीं, तो यह पैसा कहाँ कट गया. दरअसल, बैंक कई ऐसी सामान्य बैंकिंग सुविधाओं पर सर्विस चार्ज वसूलते हैं, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में मुफ्त मानकर इस्तेमाल करते रहते हैं.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आधिकारिक पोर्टल और प्रमुख बैंकों के सर्विस चार्ज शेड्यूल के अनुसार, ऐसे कई छुपे हुए नियम हैं जिनकी जानकारी न होने पर ग्राहकों की जेब से पैसे कटते रहते हैं.
ATM से सिर्फ बैलेंस चेक करने और मिनी स्टेटमेंट का चार्ज
ज्यादातर लोगों को लगता है कि जब वे एटीएम मशीन से नकदी निकालेंगे, तभी वह फ्री ट्रांजैक्शन की गिनती में आएगा. लेकिन बैंकिंग नियम इससे अलग हैं. बैंक हर महीने अपने एटीएम से 5 और दूसरे बैंकों के एटीएम से 3 मुफ्त ट्रांजैक्शन देते हैं. इसमें सिर्फ पैसे निकालना ही नहीं, बल्कि बैलेंस चेक करना और मिनी स्टेटमेंट निकालना (नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन) भी शामिल होता है. जैसे ही यह तय फ्री लिमिट खत्म होती है, सिर्फ स्क्रीन पर बैलेंस देखने पर भी 8 से 10 रुपये और उस पर 18 फीसदी जीएसटी कट जाता है.
खाते से कटने वाला तिमाही एसएमएस अलर्ट शुल्क
बैंक आपके खाते में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल की जानकारी मोबाइल पर मैसेज के जरिए भेजते हैं. इसके बदले कई बैंक हर तीन महीने में 15 से 25 रुपये तक का एसएमएस चार्ज खाते से काट लेते हैं. आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार, धोखाधड़ी रोकने वाले अनिवार्य सिक्योरिटी मैसेज पर बैंक मनमाना चार्ज नहीं लगा सकते, लेकिन अन्य सामान्य और प्रमोशनल अलर्ट्स के नाम पर यह कटौती नियमित रूप से पासबुक में दिखाई देती है.
क्या पेनल्टी कटने से खाता माइनस में जा सकता है?
कई खाताधारकों के मन में यह डर बना रहता है कि अगर बैंक खाते में लंबे समय तक पैसे न रखे जाएं, तो क्या पेनल्टी कटते-कटते बैलेंस माइनस में चला जाएगा. आरबीआई के नियमों के अनुसार, बैंक किसी भी तरह का मेंटेनेंस या सर्विस चार्ज काटकर ग्राहक का बैलेंस कभी भी नेगेटिव यानी माइनस में नहीं कर सकते. चार्ज कटने की स्थिति में भी खाते का बैलेंस अधिकतम शून्य तक ही जा सकता है.
अनचाहे चार्ज से बचने के आसान तरीके
अनावश्यक शुल्कों से बचने के लिए एटीएम जाकर बार-बार बैलेंस चेक करने की आदत से बचें. इसके बजाय बैंक की आधिकारिक मिस्ड कॉल सुविधा, वॉट्सऐप बैंकिंग या यूपीआई ऐप से बैलेंस देखें. इसके अलावा, जिन बैंक खातों का आप लंबे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उन्हें लावारिस छोड़ने के बजाय अपनी होम ब्रांच जाकर हमेशा के लिए बंद करवा देना ही बेहतर विकल्प होता है.
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