H1B वीजा महंगा! लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की अमेरिका की नौकरी अब खतरे में

H-1B Visa: अमेरिकी प्रशासन ने H1B वीजा शुल्क में भारी वृद्धि की है. इससे लाखों भारतीय आईटी और STEM प्रोफेशनल्स की अमेरिका में नौकरी और करियर के अवसर जोखिम में हैं. कंपनियाँ हायरिंग स्ट्रैटजी और प्रोजेक्ट डिलीवरी में बदलाव कर सकती हैं.

H-1B Visa: अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल ही में H-1B वीजा शुल्क में भारी वृद्धि करने का फैसला भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. खासकर आईटी और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमैटिक्स) सेक्टर के उन विशेषज्ञों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जो अमेरिका में काम करने के लिए इस वीजा पर निर्भर हैं.

भारतीयों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी

अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 (FY2023) में कुल 3,86,318 H-1B याचिकाएं स्वीकृत हुईं. इनमें से लगभग 72% भारतीय नागरिकों के लिए थीं. इसका मतलब है कि करीब 2.78 लाख भारतीय प्रोफेशनल्स को H-1B वीजा मिला. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा कंप्यूटर और आईटी संबंधित नौकरियों का था. करीब 65% अनुमोदन कंप्यूटर व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिला, यानी लगभग 1.8 लाख भारतीय आईटी एक्सपर्ट्स.

भारतीय आईटी वर्कफोर्स पर असर

भारत की आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) इंडस्ट्री में लगभग 54 लाख लोग कार्यरत हैं. इसमें H-1B वीजा धारकों की हिस्सेदारी करीब 3.3% से 5.2% के बीच है. यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन यह वही तबका है जिसमें सबसे दक्ष इंजीनियर, प्रोजेक्ट लीडर और डोमेन एक्सपर्ट शामिल हैं. यही वर्ग अमेरिका की टेक कंपनियों के रिसर्च और डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा है.

संभावित चुनौतियां और विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क वृद्धि से अमेरिकी कंपनियां नए वीजा स्पॉन्सर करने या पुराने वीजा नवीनीकरण से कतराने लगेंगी. इसके चलते कंपनियां कुछ वैकल्पिक रास्ते अपना सकती हैं, जैसे:

  • भारत से ऑफशोर डिलीवरी बढ़ाना
  • अमेरिका में लोकल टैलेंट की भर्ती करना
  • रिमोट वर्क मॉडल को तेजी से अपनाना

इस बदलाव से भारत के आईटी सेक्टर को अल्पकालिक लाभ भी मिल सकता है, क्योंकि कंपनियां प्रोजेक्ट्स को सीधे भारत से संचालित करने की ओर बढ़ेंगी. आईटी के अलावा, अमेरिका में काम करने वाले विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग के पेशेवरों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा. हालांकि इनकी संख्या कंप्यूटर संबंधित प्रोफेशनल्स की तुलना में काफी कम है, लेकिन रिसर्च और उच्च शिक्षा क्षेत्र में इनके लिए अवसर सीमित हो सकते हैं.

भारत के लिए चिंता का विषय

भारत के लिए मुख्य चिंता नौकरी छिनने की नहीं बल्कि करियर अवसरों और गतिशीलता (mobility) में कमी की है. जिन युवाओं का सपना अमेरिका में काम करने का है, उनकी राह और कठिन हो सकती है.

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि:

  • यह नीति केवल नए वीजा पर लागू होगी या नवीनीकरण पर भी
  • क्या कुछ श्रेणियों को छूट दी जाएगी
  • उद्योग जगत की लॉबिंग और कानूनी चुनौतियां किस तरह से नीति को प्रभावित करेंगी

संभावना है कि अमेरिकी टेक इंडस्ट्री और लॉ फर्म्स इस फैसले का विरोध करेंगी, जिससे लागू करने की प्रक्रिया में देरी या बदलाव हो सकता है.

Also Read : PF पासबुक के लिए अब नहीं लगेगा अलग पोर्टल, EPFO ने दी बड़ी राहत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >