Groww Report : हम और आप रोजाना मोबाइल ऐप के जरिए पैसे ट्रांसफर करते हैं, क्यूआर कोड स्कैन करते हैं और सोचते हैं कि अब तो बैंकिंग पूरी तरह डिजिटल और ‘पेपरलेस’ हो चुकी है. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. भारतीय बैंक आज भी कागजी काम-काज, फॉर्म, पासबुक, स्टेटमेंट और चेकबुक की छपाई पर हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं.
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Groww ने हाल ही में वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए भारतीय बैंकों द्वारा प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर किए गए खर्च के आंकड़े जारी किए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शेयर की गई यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और इसके आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं.
एसबीआई (SBI) का स्टेशनरी बिल सबसे भारी
रिपोर्ट के मुताबिक, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पेन और पेपर के इस्तेमाल के मामले में सबसे आगे रहा. एसबीआई ने एक साल में प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर 986.4 करोड़ रुपये खर्च किए. हालांकि, रकम के मामले में यह बहुत बड़ी दिखती है, लेकिन एसबीआई के विशाल साम्राज्य और नेट प्रॉफिट को देखते हुए यह उसके कुल मुनाफे का केवल 1.22% ही है.
एसबीआई के ठीक पीछे देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक HDFC Bank है, जिसने इस अवधि के दौरान स्टेशनरी पर 922.5 करोड़ रुपये (कुल मुनाफे का 1.26%) खर्च किए. वहीं, ICICI Bank इस मामले में काफी किफायती रहा, जिसने सिर्फ 318.5 करोड़ रुपये (मुनाफे का 0.58%) खर्च किए.
IDFC First Bank ने मुनाफे के अनुपात में बनाया रिकॉर्ड
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा IDFC First Bank से जुड़ा है. भले ही यह बैंक कुल खर्च के मामले में बड़े बैंकों से पीछे हो, लेकिन अपने मुनाफे के अनुपात में इसने सबको पीछे छोड़ दिया. मुनाफे का 8% कागज पर: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने एक साल में स्टेशनरी पर 122.7 करोड़ रुपये खर्च किए. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि बैंक ने अपने हर 100 रुपये के शुद्ध मुनाफे (Net Profit) में से 8.05 रुपये सिर्फ पेन, कागज, छपाई और फाइलों पर खर्च कर दिए. यह किसी भी प्रमुख लिस्टेड बैंक के मुकाबले सबसे अधिक अनुपात है.
प्रमुख बैंकों के स्टेशनरी खर्च
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