Flight Seat Pricing Rule: केंद्र सरकार ने एयरलाइंस के लिए जारी किया गया वह आदेश वापस ले लिया है, जिसमें फ्लाइट की 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के देने की बात कही गई थी. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को इस फैसले को फिलहाल के लिए रोक दिया है.
क्या था सरकार का पुराना फैसला?
17 मार्च को सरकार ने DGCA को निर्देश दिया था कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें यात्रियों के लिए फ्री सिलेक्शन के लिए उपलब्ध होनी चाहिए. इसका मकसद आम यात्रियों को बिना किसी एक्स्ट्रा खर्च के सीट चुनने की सुविधा देना था. अभी के नियम के मुताबिक, सिर्फ 20% सीटें ही मुफ्त मिलती हैं, बाकी के लिए 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं.
कंपनियों ने क्यों किया इसका विरोध?
इंडिगो (IndiGo), एयर इंडिया (Air India) और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस का कहना था कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उनकी कमाई कम हो जाएगी. इसकी भरपाई के लिए उन्हें हवाई टिकटों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे. कंपनियों का तर्क था कि यह फैसला मार्केट के मौजूदा नियमों के खिलाफ है.
अब यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार ने कहा है कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी जांच और चर्चा नहीं हो जाती, तब तक पुराना नियम ही लागू रहेगा. यानी फिलहाल आपको अपनी मनपसंद सीट के लिए पहले की तरह ही पैसे देने पड़ सकते हैं. हालांकि, सरकार ने DGCA को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि एक ही PNR पर टिकट बुक करने वालों को साथ में सीट मिले और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह ट्रांसपेरेंट हो.
क्या भविष्य में बढ़ेंगे टिकट के दाम?
एयरलाइंस का साफ कहना है कि मुफ्त सीट का बोझ सीधे तौर पर किराए पर पड़ेगा. मंत्रालय ने इन्हीं ‘किराया संरचना चिंताओं’ (Fare Structure Concerns) को देखते हुए अपना फैसला बदल लिया है. फिलहाल सरकार म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट ले जाने जैसी अन्य सुविधाओं पर ध्यान दे रही है, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो.
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