सऊदी अरब के कारण बढ़े कमर्शियल सिलेंडर के दाम, सरकार ने बताया हिसाब

LPG Price Hike: पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल गैस की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 44% का उछाल और हॉर्मुज में सप्लाई का रुकना है.

LPG Price Hike: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर आधिकारिक ‘कैलकुलेशन’ जारी कर दिया है. सरकार ने साफ किया है कि यह इजाफा घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि सऊदी अरब से आने वाली गैस की कीमतों में आए भारी उछाल और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में उपजे संकट की वजह से हुआ है.

सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 44% का तगड़ा उछाल

सरकार ने आंकड़ों के जरिए बताया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी (LPG) के दाम किस कदर बढ़े हैं. पिछले महीने सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) $542 प्रति मीट्रिक टन (MT) था. इस महीने (मार्च) यह बढ़कर सीधे $780/MT पर पहुंच गया है. केवल एक महीने के भीतर कच्चे माल की कीमत में 44% की वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर भारत में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों पर पड़ा है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का ‘ट्रैफिक जाम’

कीमतों में इस आग का एक बड़ा कारण भौगोलिक तनाव भी है. मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में दुनिया की कुल एलपीजी सप्लाई का 20% से 30% हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसा हुआ है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में गैस की भारी कमी (Shortage) हो गई है और दाम आसमान छूने लगे हैं.

सरकार उठा रही है ₹380 प्रति सिलेंडर का घाटा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो) के दाम बाजार के अनुसार बढ़े हैं, लेकिन आम जनता की रसोई को इससे पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.

  • घरेलू सिलेंडर: 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹913 पर ही जमी हुई है.
  • भारी सब्सिडी: सरकार और तेल कंपनियां हर घरेलू सिलेंडर पर ₹380 का घाटा खुद सह रही हैं.
  • कुल नुकसान: इस साल मई के अंत तक तेल कंपनियों का कुल घाटा लगभग ₹40,484 करोड़ पहुंचने का अनुमान है, जिसे सरकार और कंपनियां मिलकर वहन करेंगी.

सरकार ने यह तर्क भी दिया है कि कमर्शियल सिलेंडर, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से होटलों और उद्योगों में होता है, उसकी देश की कुल एलपीजी खपत में हिस्सेदारी 10% से भी कम है. चूंकि यह सेक्टर ‘डीरेगुलेटेड’ (बाजार आधारित) है, इसलिए इसकी कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय दरों के हिसाब से बदलती हैं. वहीं, 90% से ज्यादा खपत वाले घरेलू और उज्ज्वला ग्राहकों को सरकार ने महंगाई की आंच से बचा लिया है.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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