Import Duty On Cotton : देश के वस्त्र और परिधान (Textile and Apparel) क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने शनिवार (30 मई, 2026) को कपास (Cotton) के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क (Customs Duty) से अगले पांच महीने यानी 30 अक्टूबर, 2026 तक पूरी छूट देने की घोषणा की है .केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, आयात शुल्क में मिलने वाली यह बड़ी छूट 1 जून, 2026 से प्रभावी (लागू) हो जाएगी.
क्यों लिया गया यह फैसला ?
सरकार के इस अस्थायी (Temporary) कदम से बाजार और कपड़ा उद्योग को कई मोर्चों पर मजबूती मिलने की उम्मीद है.
- सस्ता होगा कच्चा माल: इस शुल्क छूट से कपड़ा और परिधान बनाने वाली कंपनियों के लिए कच्चे माल (कपास) की लागत में बड़ी कमी आएगी। जब कच्चा माल सस्ता होगा, तो आगे चलकर कपड़े और तैयार गारमेंट्स की कीमतें भी कम हो सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी.कपास की किल्लत होगी दूर: इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय वस्त्र क्षेत्र के लिए बाजार में कपास की उपलब्धता (Availability) काफी बढ़ जाएगी, जिससे कंपनियों को उत्पादन में कोई रुकावट नहीं आएगी.MSMEs को बूस्टर डोज: वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से घरेलू वस्त्र उद्योग, विशेष रूप से लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के कामकाज और प्रदर्शन पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि उनके पास बड़े कॉरपोरेट्स की तरह भारी बजट नहीं होता.
किसानों के हितों का भी रखा गया ध्यान
सरकार ने इस नीति को इस तरह तैयार किया है जिससे विदेशी कपास आने के बावजूद देश के घरेलू किसानों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। यह छूट केवल आगामी 30 अक्टूबर तक (यानी नए कताई सीजन की शुरुआत से पहले तक) के लिए ही सीमित रखी गई है, ताकि जब भारतीय किसानों की नई कपास फसल बाजार में आए, तब उन्हें अपनी उपज के सही और वाजिब दाम मिल सकें.
