Gold-Silver Price: मंगलवार (7 जुलाई) को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. पहली नजर में यह खरीदारी का अच्छा मौका लग सकता है, लेकिन बाजार के जानकार कह रहे हैं कि सिर्फ कीमत गिरने से खरीदारी शुरू कर देना सही फैसला नहीं होगा. उनका मानना है कि अभी थोड़ा इंतजार करना ज्यादा समझदारी हो सकती है.
कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी?
मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों की कीमतों में अच्छी-खासी गिरावट दर्ज की गई.
| धातु | कितनी गिरावट | नई कीमत |
| सोना (अगस्त डिलीवरी) | ₹1,417 (0.96%) | ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम |
| चांदी (सितंबर डिलीवरी) | ₹3,648 (1.55%) | ₹2.32 लाख प्रति किलोग्राम |
सिर्फ भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में रहे.
- गोल्ड फ्यूचर्स 1.04% गिरकर 4,122.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया.
- सिल्वर फ्यूचर्स 2.11% टूटकर 60.73 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा.
यानी घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में कमजोरी देखने को मिली.
क्या अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए?
अगर आप निवेश के लिए सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो DSP Netra की जुलाई मार्केट रिपोर्ट जल्दबाजी करने की सलाह नहीं देती. रिपोर्ट में सोना और चांदी दोनों पर न्यूट्रल रुख रखा गया है. यानी गिरावट जरूर आई है, लेकिन अभी निवेश बढ़ाने का सही समय नहीं माना गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक—
- सोना अपनी अनुमानित उचित कीमत (Fair Value) से करीब 10.7% नीचे कारोबार कर रहा है.
- चांदी अपनी अनुमानित उचित कीमत से करीब 21.8% नीचे है.
फिर भी एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि निवेश बढ़ाने से पहले कुछ और मजबूत संकेत मिलें.
आगे कीमतें बढ़ेंगी या अभी और गिर सकती हैं?
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह का कहना है कि MCX पर सोना अभी कंसोलिडेशन फेज में है. यानी कीमतें फिलहाल एक तय दायरे में घूम रही हैं.
उनके अनुसार—
- ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है.
- ₹1.48 लाख के आसपास बड़ा रेजिस्टेंस है.
- अगर सोना इस स्तर को मजबूती से पार कर लेता है, तो कीमत ₹1.50 लाख से ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है.
यानी फिलहाल बाजार अगली बड़ी चाल का इंतजार कर रहा है.
आखिर कीमतों में गिरावट आई क्यों?
सोना और चांदी की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक कारण रहे.
- अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है.
- महंगाई पूरी तरह काबू में नहीं आई है.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक जहाज पर हमले की खबर के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा.
- इन घटनाओं से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव आ गया.
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स पर है. इससे यह संकेत मिल सकता है कि आगे ब्याज दरों में क्या फैसला हो सकता है. यही फैसला आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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