Crude Oil Price: दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ जारी जंग ने कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार में आग लगा दी है. करीब चार साल में पहली बार तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं.
एक हफ्ते में 50% तक की भारी बढ़त
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया था, तब से अब तक तेल की कीमतों में 50% का इजाफा हो चुका है. सोमवार को जब बाजार खुला, तो ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) सीधे $114 प्रति बैरल पर जा पहुंचा. शुक्रवार को यह करीब $92 पर बंद हुआ था, यानी सिर्फ एक दिन के व्यापार में 23% से ज्यादा की तेजी देखी गई.
क्यों लग रही है तेल के बाजार में आग ?
इस संकट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं.
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल (करीब 1.5 करोड़ बैरल रोज) इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से इस रास्ते से टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है.
- उत्पादन में कटौती: इराक, कुवैत और यूएई जैसे बड़े उत्पादक देशों ने तेल का उत्पादन कम कर दिया है. निर्यात न हो पाने की वजह से उनके स्टोरेज टैंक भर चुके हैं.
- तेल ठिकानों पर हमले: युद्ध के दौरान ईरान, इजरायल और अमेरिका ने एक-दूसरे के तेल और गैस प्लांट को निशाना बनाया है, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है.
शेयर बाजारों में हाहाकार
तेल की कीमतों में आई इस 25% की उछाल का असर सीधा शेयर बाजारों पर पड़ा. सोमवार सुबह एशियाई बाजारों (Asian Stock Markets) में भारी गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों को डर है कि महंगा तेल महंगाई बढ़ाएगा और कंपनियों की लागत में इजाफा करेगा.
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर ?
अगर तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना तय है. इससे माल ढुलाई महंगी होगी और खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामानों तक हर चीज पर महंगाई की मार पड़ेगी. इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय तेल के दाम इस स्तर पर देखे गए थे.
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