गौतम अदाणी को बंबई हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मार्केट रेगुलेशन उल्लंघन मामले में मिली क्लीन चिट

Gautam Adani: गौतम अदाणी और राजेश अदाणी को बंबई हाईकोर्ट से मिली राहत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है. इससे उनके व्यापार और निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ है. अदाणी समूह की छवि को फिर से सुधारने में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

Gautam Adani: बंबई हाईकोर्ट ने सोमवार को अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और प्रबंध निदेशक राजेश अदाणी को एक बड़ी राहत देते हुए उन्हें बाजार विनियमनों के उल्लंघन के आरोप से बरी कर दिया. कोर्ट ने यह साफ किया है कि दोनों उद्योगपतियों के खिलाफ धोखाधड़ी या आपराधिक साजिश का कोई मामला नहीं बनता है. इस फैसले से अदाणी समूह को एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है, जो उनके लिए कारोबार में सकारात्मक संकेत साबित हो सकती है.

क्या था मामला?

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने साल 2012 में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) और इसके प्रवर्तकों गौतम अदाणी और राजेश अदाणी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप था कि उन्होंने बाजार विनियमनों का उल्लंघन किया था और इन पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया गया था. इसके बाद मामले में अदाणी परिवार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था.

अदाणी परिवार ने अदालत में क्या दलील दी?

अदाणी परिवार ने 2019 में बंबई हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी और सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द करने की अपील की थी. इसमें उन्हें मामले से बरी करने से इनकार कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने इस मामले की गहनता से सुनवाई की और दोनों उद्योगपतियों को मामले से बरी कर दिया.

अदालत का निर्णय और उसका महत्व

न्यायमूर्ति आर एन लड्ढा की अध्यक्षता में बंबई हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए गौतम अदाणी और राजेश अदाणी को राहत दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में धोखाधड़ी का कोई प्रमाण नहीं है और जब धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता, तो आपराधिक साजिश का आरोप भी नहीं टिक सकता है.

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अदाणी समूह पर असर

हाईकोर्ट का यह फैसला अदाणी समूह के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि अदालत का फैसला उनके कारोबार और निवेशकों के विश्वास के लिए सकारात्मक संकेत देने वाला है. अदाणी समूह पहले ही कई बड़े उद्योगों में अपनी पकड़ बना चुका है और इस फैसले से उनकी प्रतिष्ठा को भी मजबूती मिली है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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