Quick Read: 9 घोषणाओं में वित्त मंत्री ने मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग को समेटा

Finance Minister Nirmala Sitharaman made big announcements in Economic Package : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के दूसरी किस्त की घोषणा की. उन्होंने आज यह जानकारी दी कि सरकार किसानों, प्रवासी मजदूरों और फुटपाथ दुकानदारों के लिए क्या योजनाएं लेकर आयी है, जो कोविड 19 के दौर में उन्हें राहत देगी. वित्तमंत्री ने घोषणाओं की शुरुआत करते हुए कहा कि तीन करोड़ किसान पहले ही सस्ती ब्याज दर पर चार लाख करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुके हैं.

नयी दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के दूसरी किस्त की घोषणा की. उन्होंने आज यह जानकारी दी कि सरकार किसानों, प्रवासी मजदूरों और फुटपाथ दुकानदारों के लिए क्या योजनाएं लेकर आयी है, जो कोविड 19 के दौर में उन्हें राहत देगी. वित्तमंत्री ने घोषणाओं की शुरुआत करते हुए कहा कि तीन करोड़ किसान पहले ही सस्ती ब्याज दर पर चार लाख करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुके हैं. प्रधानमंत्रह नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के प्रकोप से प्रभावित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को राहत पहुंचाने के लिए मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी के करीब 10 प्रतिशत) के आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की थी. आइए जानते हैं कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं में क्या था खास-

– प्रवासी मजदूरों के राशन के लिए 35 सौ करोड़ की सहायता दी जा रही है. आठ करोड़ मजदूरों को अगले दो महीने तक पांच-पांच किलो चावल, गेहूं और एक किलो चना दिया जायेगा. यह सुविधा बिना राशनकार्ड वालों के लिए भी है.

-छह लाख से 18 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले मध्यम आय श्रेणी परिवारों के लिए किफायती आवास योजना का लाभ मार्च 2021 तक बढ़ाया जायेगा.

-अगले तीन महीने में एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना को लागू कर दिया जायेगा, जिसके बाद एक ही राशन कार्ड से देश के किसी भी स्थान पर गरीबों को राशन मिलेगा.

– देश में कामगारों को न्यूनतम वेतन दिलाने के लिए सरकार कर रही है प्रयास. सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र दिया जायेगा साथ ही उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं भी दी जायेंगी. सरकार यह प्रयास करेगी कि मजदूरों को ईएसआईसी की सुविधा मिले. साथ ही जिन जगहों पर महिलाएं रात को काम करती हैं, वहां सुरक्षा की व्यवस्था होगी.

– सरकार ने 50 हजार रुपये तक के मुद्रा-शिशु ऋण के लिए 1,500 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता योजना की घोषणा की.

-कोरोना वायरस संकट के दौरान 12,000 स्वयं सहायता समूहों ने 3 करोड़ मास्क और 1.2 लाख लीटर सैनिटाइजर बनाया. इन्हें पैसा पोर्टल के जरिये कोष उपलब्ध कराया जा रहा है. पिछले दो महीनों में शहरी गरीबों के लिए 7,200 नये स्वयं सहायता समूह बनाये गये.

– प्रवासी मजदूरों को सरकार मनरेगा के तहत काम देगी. यह प्रयास होगा कि 50 प्रतिशत मजदूरों को मनरेगा के तहत काम दिया जाये और इसके लिए सरकार ने राज्य सरकारों को निर्देश दे दिया है.

-सरकार यह प्रयास करेगी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे घरों का निर्माण किया जायेगा, जहां प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों को कम किराये पर घर मिल सके.

– कोविड के दौर में फुटपाथ दुकानदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा इसलिए इन 50 लाख फुटपाथ दुकानदारों के लिए सरकार पांच हजार करोड़ रुपये की सहायता देगी.

-ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में खासकर आदिवासियों को रोजगार देने के लिए सरकार कैंपा फंड के तहत छह करोड़ का प्रावधान करेगी.

– सरकार किसानों को 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता देगी जो उन्हें नाबार्ड के जरिये मिलेगा.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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